प्रेम की एक ही भाषा

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
कोई इटली जाए और संसार की सबसे दर्द भरी प्रेम कहानी की आहट न सुन सके तो यह उसकी किस्मत का दोष है।
जात क्या पूछो साउथ की

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
राष्ट्र एक ही है, यूँ तो, हम सब एक ही हैं, बस यह बात कोई आल्टो कार वाला होंडा सिटी वाले से ना कह दे, होंडा सिटी वाला फौरन खंडन करके बता देगा कि ना हम एक नहीं हैं, कार के हिसाब से तुझमें और मुझमें वही फर्क है, जो बंगलादेश और इंडिया में है।
963 झरोखों वाला गुलाबी नगरी का हवा महल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गुलाबी शहर जयपुर में स्थित हवा महल राधा और कृष्ण को समर्पित है। यह महल जयपुर शहर की पहचान है। यह एक राजसी-महल है। सन 1798 में बना ये महल किसी राजमुकुट सा दिखायी देता है। हवा महल की पाँच-मन्जिला इमारत ऊपर से महज डेढ़ फीट चौड़ी है। यह बाहर से देखने पर हवा महल किसी मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखायी देती है।
मौन और मुस्कुराहट

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
नीरो कभी बाँसुरी नहीं बजाता था। उसे बाँसुरी बजानी भी नहीं आती थी। जिसे बाँसुरी बजानी आयेगी, वह नीरो नहीं हो सकता।
मुफ्त का यश

प्रेमचंद :
उन दिनों संयोग से हाकिम-जिला एक रसिक सज्जन थे। इतिहास और पुराने सिक्कों की खोज में उन्होंने अच्छी ख्याति प्राप्त कर ली थी। ईश्वर जाने दफ्तर के सूखे कामों से उन्हें ऐतिहासिक छान-बीन के लिए कैसे समय मिल जाता था। वहाँ तो जब किसी अफसर से पूछिए, तो वह यही कहता है 'मारे काम के मरा जाता हूँ, सिर उठाने की फुरसत नहीं मिलती।' शायद शिकार और सैर भी उनके काम में शामिल है ? उन सज्जन की कीर्तियाँ मैंने देखी थीं और मन में उनका आदर करता था; लेकिन उनकी अफसरी किसी प्रकार की घनिष्ठता में बाधक थी।
मुरादें पूरी करती हैं माँ विंध्यवासिनी

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
शक्ति की देवी माँ विंध्यवासिनी का मन्दिर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के विंध्याचल में स्थित है। यह स्थान मुगलसराय से इलाहाबाद रेल मार्ग पर पड़ता है। इसे जागृत शक्ति पीठ माना जाता है। यह देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। आद्य शक्ति भगवती विंध्यवासिनी का विंध्य पर्वत माला में हमेशा से निवास स्थान रहा है। महाभारत के विराट पर्व में धर्मराज युद्धिष्ठिर ने माँ विंध्यवासिनी की स्तुति की है।
वो बात ना रही

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
अगर आपके मुँह से यह बात लगातार निकल रही हो तमाम चीजों को देखकर कि वो बात ना रही, तो समझिये कि आप बुजुर्ग हो रहे हैं या फिर आपके इर्द गिर्द लोगों के मुँह से यही निकल रहा हो कि वो बात नहीं रही, तो समझिये कि आपकी उठक बैठक बुजुर्गों में हो रही है।
कब जीना शुरू करेंगे

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मेरे एक दोस्त के पिताजी ने मुझे बताया था कि उनके किसी मित्र ने रिटायरमेंट के बाद बिहार में पेंशन पाने के लिए न सिर्फ अपने कई जोड़े जूते घिस दिये, बल्कि उन्हें अपना हुलिया तक बदलवाना पड़ा। पूरी कहानी लिखूँगा लेकिन पहले आपको अपने साथ आज इटली की सैर कराऊँगा।
रोज गार्डन चंडीगढ़ – फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
चंडीगढ़ शहर रॉक गार्डेन के अलावा रोज गार्डेन यानी गुलाबों के उद्यान के लिए भी जाना जाता है। गुलाबों का ये उद्यान चंडीगढ़ बस स्टैंड से थोड़ी दूरी पर ही सेक्टर-16 में स्थित है। खासकर वसंत के मौसम में यहाँ गुलाबों की क्यारियाँ जन्नत सा नजारा पेश करती हैं।
रियासत का दीवान

प्रेमचंद :
महाशय मेहता उन अभागों में थे, जो अपने स्वामी को प्रसन्न नहीं रख सकते थे। वह दिल से अपना काम करते थे और चाहते थे कि उनकी प्रशंसा हो। वह यह भूल जाते थे कि वह काम के नौकर तो हैं ही, अपने स्वामी के सेवक भी हैं। जब उनके अन्य सहकारी स्वामी के दरबार में हाजिरी देते थे, तो वह बेचारे दफ्तर में बैठे कागजों से सिर मारा करते थे। इसका फल यह था कि स्वामी के सेवक तो तरक्कियाँ पाते थे, पुरस्कार और पारितोषिक उड़ाते थे। और काम के सेवक मेहता किसी-न-किसी अपराध में निकाल दिये जाते थे। ऐसे कटु अनुभव उन्हें अपने जीवन में कई बार हो चुके थे; इसलिए अबकी जब राजा साहब सतिया ने उन्हें एक अच्छा पद प्रदान किया, तो उन्होंने प्रतिज्ञा की कि अब वह भी स्वामी का रुख देखकर काम करेंगे। और
दूसरी बड़ी सभ्यता रोम

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
जब आप मेरी पोस्ट पढ़ रहे होते हैं, मैं सातवें आसमान की सैर कर रहा होता हूँ। आप एक-एक पंक्ति पढ़ते हैं और मैं उस आसमान से आपके चेहरे की मुस्कुराहट को महसूस करता हूँ। फिर आप लाइक बटन दबाते हैं और मैं खुशी के मारे आसमान में ही नृत्य करने लगता हूँ। यही है प्यार।
गोल्डेन बीच चेन्नई की तिलिस्मी दुनिया

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
चेन्नई शहर के बाहरी इलाके में स्थित है गोल्डेन बीच की तिलिस्मी दुनिया। चेन्नई घूमने वालों की यह खास पसन्द है। गोल्डेन बीच को आप तमाम हिन्दी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में देख चुके हैं। यह निजी तौर पर विकसित किया गया समुद्र तट है जहाँ पर कई घंटे परिवार के साथ घूमने का आनन्द लिया जा सकता है।



संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
प्रेमचंद :





