Thursday, March 19, 2026
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सबरंग

घासवाली

प्रेमचंद :

मुलिया हरी-हरी घास का गट्ठा लेकर आयी, तो उसका गेहुआँ रंग कुछ तमतमाया हुआ था और बड़ी-बड़ी मद-भरी आँखो में शंका समाई हुई थी। महावीर ने उसका तमतमाया हुआ चेहरा देखकर पूछा- क्या है मुलिया, आज कैसा जी है।

आरा जिला घर बा..कौन बात के डर बा…

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

आरा यानी वीर कुअँर सिंह का शहर। आरा मतलब पुराने शाहाबाद का मुख्यालय। कहावत मशहूर है... आरा जिला घर बा...कौन बात के डर बा...आकाश में धोती सुखेला...हालाँकि आरा नाम का जिला कभी नहीं रहा। जिले का नाम तो शाहाबाद था। जब यह बिहार के पुराने 17 जिलों में एक था। अब जिले के चार टुकड़े हो गये हैं। अब भोजपुर जिला है जिसका मुख्यालय आरा है। इस भोजपुर के नाम पर भोजपुरी भाषा बनी है जिसे 20 करोड़ लोग ओढते बिछाते हैं।

पटना का श्री लक्ष्मीनारायण बिरला मन्दिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

श्री लक्ष्मी नारायण मन्दिर यानी बिरला मन्दिर पटना के बाकरगंज में स्थित है। यह देश भर में बिरला परिवार द्वारा बनवाए गये मन्दिरों में से एक है। पटना में बिरला मन्दिर शहर के प्रमुख मन्दिरों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मन्दिर अशोक राजपथ पर सब्जीबाग के पास स्थित है। मन्दिर के पास ही खेतान मार्केट नामक प्रमुख बाजार है।

छत पर भजन

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार

डिस्क्लेमर - प्राचीन अन्धेर नगरी की ये अति प्राचीन बिजली-कथाएँ अगर किसी को उत्तर-प्रदेश, बिहार और दिल्ली की लगें, तो इसकी जिम्मेदारी तमाम सरकारों की है।

तावान

प्रेमचंद :

छकौड़ीलाल ने दुकान खोली और कपड़े के थानों को निकाल-निकाल रखने लगा कि एक महिला, दो स्वयंसेवकों के साथ उसकी दुकान छेकने आ पहुँची। छकौड़ी के प्राण निकल गये।

माया

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

कल रात लौट आया माया के पास। 

आखिरी हीला

प्रेमचंद :

यद्यपि मेरी स्मरण-शक्ति पृथ्वी के इतिहास की सारी स्मरणीय तारीखें भूल गयीं, वह तारीखें जिन्हें रातों को जागकर और मस्तिष्क को खपाकर याद किया था; मगर विवाह की तिथि समतल भूमि में एक स्तंभ की भाँति अटल है। न भूलता हूँ, न भूल सकता हूँ।

कोट मुक्ति

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

प्रेम की बात करते-करते मैं निकल पड़ा हूँ धर्म यात्रा पर। एकदम अचानक, एकदम अप्रायोजित। 

कुम्हरार – खंडहर सुनाते हैं बुलन्द इमारत की दास्ताँ

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

बिहार की राजधानी पटना में अगर इतिहास से रूबरू होना हो तो कुम्हार पहुँचे। कुम्हार के खंडहरों में अतीत की स्मृतियाँ हैं। यहाँ आकर आप इतिहास से साक्षात्कार कर सकते हैं। कुम्हारार वह जगह है जहाँ सम्राट अशोक के शासन काल में तृतीय बौद्ध संगीति हुई थी।

पंडौल – यहाँ पांडवों ने किया था अज्ञातवास

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

पंडौल यानी पांडवों का आवास। मधुबनी जिले के पंडौल के  बारे में कहा जाता है कि पांडवों ने यहाँ अज्ञातवास में कुछ वक्त गुजारा था। मैं भवानीपुर गाँव से कोई वाहन नहीं मिलने पर पैदल ही पंडौल के लिए चल पड़ता हूँ। रास्ते में एक बाइक वाले लिफ्ट माँगता हूँ। वह बोले ब्रह्मोतरा तक छोड़ दूंगा। मैं उनके बाइक पर पीछे बैठ जाता हूँ। चार किलोमीटर बाद ब्रह्मोतरा गाँव आ जाता है। यह गाँव सकरी पंडौल मुख्य मार्ग पर स्थित है। यहाँ से पंडौल दो किलोमीटर आगे है।

लांछन

प्रेमचंद :

अगर संसार में ऐसा प्राणी होता, जिसकी आँखें लोगों के हृदयों के भीतर घुस सकतीं, तो ऐसे बहुत कम स्त्री-पुरुष होंगे, जो उसके सामने सीधी आँखें करके ताक सकते ! महिला-आश्रम की जुगनूबाई के विषय में लोगों की धारणा कुछ ऐसी ही हो गयी थी। वह बेपढ़ी-लिखी, गरीब, बूढ़ी औरत थी, देखने में बड़ी सरल, बड़ी हँसमुख; लेकिन जैसे किसी चतुर प्रूफरीडर की निगाह गलतियों ही पर जा पड़ती है; उसी तरह उसकी आँखें भी बुराइयों ही पर पहुँच जाती थीं।

मर्दानगी

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

आज जो कहानी आपको सुनाने जा रहा हूँ, वो पता नहीं क्यों मुझे लग रहा है कि मैंने पहले भी आपको सुनायी है। 

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