पेशों की गरिमा बनाए रखनी चाहिए

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मेरी एक जानने वाली ने बहुत पहले तय कर लिया था कि उनकी बेटी हुई तो उसे वो डॉक्टर बनाएँगी, बेटा हुआ तो इंजीनियर।
आज की शिक्षा व्यवस्था

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
जब मैं छोटा था, माँ मेरे लिए पैंट और कमीज हाथ वाली सिलाई मशीन से घर पर खुद सिला करती थी। वो हाथ और उँगलियों से ये नाप लिया करती थी कि मेरे लिए कितने कपड़ों की जरूरत है और उसकी सिलाई एकदम शानदार हुआ करती थी।
जब महादेव ने की चाकरी – उगना महादेव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
महादेव यानी शिव का अदभुत मन्दिर है मधुबनी जिले के भवानीपुर गाँव में। उगना महादेव या उग्रनाथ मन्दिर के नाम से यह मन्दिर प्रसिद्ध है। कहा जाता है यहाँ भगवान शिव ने मैथिली के महाकवि विद्यापति की चाकरी की थी।
अनुभव

प्रेमचंद :
प्रियतम को एक वर्ष की सजा हो गयी। और अपराध केवल इतना था, कि तीन दिन पहले जेठ की तपती दोपहरी में उन्होंने राष्ट्र के कई सेवकों का शर्बत-पान से सत्कार किया था। मैं उस वक्त अदालत में खड़ी थी। कमरे के बाहर सारे नगर की राजनैतिक चेतना किसी बंदी पशु की भाँति खड़ी चीत्कार कर रही थी।
सुभागी

प्रेमचंद :
और लोगों के यहाँ चाहे जो होता हो, तुलसी महतो अपनी लड़की सुभागी को लड़के रामू से जौ-भर भी कम प्यार न करते थे। रामू जवान होकर भी काठ का उल्लू था। सुभागी ग्यारह साल की बालिका होकर भी घर के काम में इतनी चतुर, और खेती-बारी के काम में इतनी निपुण थी कि उसकी माँ लक्ष्मी दिल में डरती रहती कि कहीं लड़की पर देवताओं की आँख न पड़ जाय। अच्छे बालकों से भगवान को भी तो प्रेम है। कोई सुभागी का बखान न करे, इसलिए वह अनायास ही उसे डाँटती रहती थी। बखान से लड़के बिगड़ जाते हैं, यह भय तो न था, भय था - नजर का ! वही सुभागी आज ग्यारह साल की उम्र में विधवा हो गयी।
परिवार और रिश्ते

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मेरी साली के बेटे से स्कूल टीचर ने उसके परिवार की तस्वीर बनाने के लिए कहा।
सीतामढ़ी टू दरभंगा वाया रेल एंड रोड

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
सीतामढ़ी से दरभंगा कभी मीटर गेज रेलवे लाइन थी। अब ब्राडगेज पर रेलगाड़ियाँ दौड़ती हैं, पर रेल सेवा मे ज्यादा बदलाव नहीं आया। सीतामढ़ी से दरभंगा के बीच दिन भर में दो पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं। इनमें बेतहासा भीड़ होती है। सुबह सात बजे से पहले-पहले मैं सीतामढ़ी स्टेशन पर पहुँच जाता हूँ। एक टिकट खरीद लेता हूँ पंडौल तक के लिए। सात बजकर 10 मिनट पर आने वाली 55508 पैसेंजर 20 मिनट देर से आती है।
अज्ञानता की पट्टी उतारने वाले ही जीतते हैं

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश कि महाभारत काल में गांधारी की शादी जब हस्तीनापुर के नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र से हो गई, तो गांधार के लोगों ने उस पर क्या प्रतिक्रिया जतायी? क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश की कि जब कोई स्त्री अपने विवाह को अपनी किस्मत मान कर अपनी आँखों पर पट्टी बांध लेती है, तो उससे जुड़े लोगों पर क्या गुजरती है?
भिखना ठोरी – यहाँ जार्ज पंचम ने मारे थे 39 बाघ

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
बिहार के पश्चिम चंपारण जिले का भिखना ठोरी रेलवे स्टेशन। गवनहा ब्लाक में स्थित भिखना ठोरी के जंगलों में बिखरे हैं इतिहास के कई पन्ने। यह इलाका ब्रिटेन के राजा जार्ज पंचम के शिकारगाह के तौर पर प्रसिद्ध है। वे नेपाल के राजा के आमंत्रण पर इधर शिकार करने पहुँचे थे।
शिकार

प्रेमचंद :
फटे वस्त्रों वाली मुनिया ने रानी वसुधा के चाँद से मुखड़े की ओर सम्मान भरी आँखो से देखकर राजकुमार को गोद में उठाते हुए कहा, हम गरीबों का इस तरह कैसे निबाह हो सकता है महारानी ! मेरी तो अपने आदमी से एक दिन न पटे, मैं उसे घर में पैठने न दूँ।
‘बेब’ कहीं का

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
'बेब' - ये नाम सुअर के एक बच्चे का है।
कायर

प्रेमचंद :
युवक का नाम केशव था, युवती का प्रेमा। दोनों एक ही कालेज के और एक ही क्लास के विद्यार्थी थे। केशव नये विचारों का युवक था, जात-पाँत के बन्धनों का विरोधी। प्रेमा पुराने संस्कारों की कायल थी, पुरानी मर्यादाओं और प्रथाओं में पूरा विश्वास रखनेवाली; लेकिन फिर भी दोनों में गाढ़ा प्रेम हो गया था। और यह बात सारे कालेज में मशहूर थी।



संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
प्रेमचंद :





