आँखों को धोखा नहीं देना चाहिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
फातमागुल एक लड़की का नाम है। एक दिन शहर से कुछ लड़के मौज-मस्ती करने शहर से दूर निकलते हैं और एक गाँव से गुजरते हुए उनकी निगाह फातमागुल पर पड़ती है। फातमागुल सुंदर, सरल और किशोरावस्था से निकल रही बच्ची है। वो गाँव के ही एक लड़के से प्रेम करती है।
दूसरों के साथ वैसा न करें, जो हमें खुद पंसद नहीं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
वैसे तो चुटकुले हँसाने के लिए होते हैं, लेकिन मैं कई चुटकुलों को सुन कर दुखी हो जाता हूँ।
आज मैं एक ऐसा ही चुटकुला आपको सुनाने जा रहा हूँ, जिसे सुन कर बहुत से लोग मुस्कुराते हैं, हँसते हैं, पर मैं उदास हो जाता हूँ।
प्रेम पाने का एक मात्र उपाय है कि प्रेम करो

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
इस कहानी को लिखने से पहले मैंने कम से कम हफ्ता भर इंतजार किया है। चाहता तो एक हफ्ता पहले ही पूरी कहानी आपको सुना सकता था। महीना भर पहले मैं अपनी उस परिचित के घर गया था, जिनकी बेटी की शादी कुछ ही दिन पहले हुई है। शादी खूब धूम-धाम से हुई थी, लेकिन शादी के बाद ससुराल में अनबन शुरू हो गयी। जरा-जरा सी बात पर झगड़े होने लगे। मेरे पास लड़की की माँ का फोन आया था कि सोनू की उसके ससुराल में नहीं बन रही।
ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज एक सुनी सुनाई कहानी सुनाता हूँ।
वैसे भी कई लोगों ने मुझे फेसबुक वाला बाबा बुलाना शुरू कर दिया है। बाबा क्यों, ये मुझे नहीं पता। मेरे तो बाल भी अभी सफेद नहीं हुए पर कुछ लोगों को लगता है कि ज्ञान देने वाला बाबा ही होता है। मुमकिन है टीवी पर तमाम बाबाओं को ऐसी बातें करते देख उनके मन में ये भाव आया हो कि ज्ञान तो बाबा ही देते हैं।
लंगट सिंह कॉलेज के वे दिन

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
वह 1987 का साल था जब मुझे हाई स्कूल यानी दसवीं पास करने के बाद कॉलेज में नामांकन लेना था। तब बिहार में 11वीं यानी इंटर से कॉलेज में पढ़ाई होने लगती थी। नंबर के आधार पर हमारा नामांकन मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज में हो गया।
रोशनी का चिराग

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज मेरी कहानी पढ़ने से पहले आप वीडियो पर क्लिक करके इस बच्ची के साथ अपना एक रिश्ता कायम कर लीजिएगा। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि बच्ची का नाम शिवानी है या संध्या। पर फर्क पड़ता है उन लोगों की कोशिशों से जो ऐसे बच्चों की आवाज बनने को तत्पर होते हैं।
रिश्तों में अच्छाई छाँटना सीखिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कहानी तो सुनानी है शिवानी की। कहानी सुनानी है नीति की और कहानी सुनानी है शुभि की। इतनी ही क्यों, वो ढेर सारी कहानियाँ मुझे आपको सुनानी हैं, जिन्हें मैं जबलपुर से आपके लिए अपने मन के कैमरे में छुपा कर लाया हूँ। अपनी कहानियों की पोटली एक-एक करके रोज खोलूंगा। आप हतप्रभ रह जाएंगे कि उन ढेर सारे मासूमों की कहानी सुन कर, जो कुछ बोल नहीं सकते, पर अपनी कहानी आपको सुनाएंगे। खुद, अपनी जुबान से।
दुनिया की सबसे विशाल घड़ी – वृहद सम्राट यंत्र – जंतर मंतर जयपुर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
जयपुर जंतर मंतर - नाड़ी वलय यंत्र
वैसे तो देश में पाँच जंतर मंतर हैं। पर इनमें जयपुर का जंतर मंतर सबसे विशाल है। अपनी विशालता और विशेषताओं के कारण ही इसे दुनिया के विश्व दाय स्मारकों की सूची मे स्थान मिल सका है। सवाई जय सिंह ने देश में कुल पाँच शहरों में जंतर मंतर का निर्माण कराया।
प्यार दो, प्यार लो

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
जबलपुर जाने का मतलब है कहानियों के संसार की यात्रा पर निकलना। एक कहानी खत्म हुई नहीं कि दूसरी शुरू। अब वहाँ कदम संस्था वालों ने इतने पेड़ लगा दिए हैं कि प्रकृति जबलपुर की मिट्टी चूमने लगी है। आसमान बादलों को मुहब्बत का पैगाम लेकर धरती के पास भेजने लगा है। ऐसा ही परसों हुआ था जब दिल्ली से उड़ा विमान जबलपुर एयरपोर्ट पर उतरने से घबराता रहा कि वहाँ तो धरती से मिलने बादल नीचे उतर आये हैं।
घड़ी में गर्लफ्रेंड

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
वक्त का वक्त भी बदल गया है। हाथ-घड़ी में पूरा स्पेस,पूरा हक अब वक्त का नहीं है, मोबाइल फोन घुस आया है घड़ी में, घड़ी मोबाइल फोन से कनेक्ट हो गयी है। सैमसंग, टाइटन समेत कईयों से ऐसी घड़ियाँ बना दी हैं। एकदम फास्ट स्पीड से घड़ी में मोबाइल के मैसेज देखो, मोबाइल खुलने में तो एकाध सेकंड लग जाता है। इतना लंबा इंतजार नयी पीढ़ी को शोभा ना देता।
मार्केटिंग के यक्ष-प्रश्न

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
मार्केटिंग-प्रधान युग में हर ज्ञान को आखिर को सेल और मुनाफे के तराजू पर ही तुलना है। कितना बेच लिया और कितना कमा लिया, हर तरह के ज्ञान के शीर्ष पर ये ही दो सवाल हैं। जिसकी सेल संभव नहीं, उसका खेल खत्म मान लिया जाता है। जैसा कि हमारे वक्त के बड़े कामेडियन- स्कालर कपिल शर्मा के कहे का आशय है-बिकता है सब कुछ, बेचनेवाला चाहिए।
तुम घटिया, तुम्हारी साड़ी घटिया

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
निवेदन-यह व्यंग्य मूलत चालीस के उस पार की आदरणीयाओं के लिए है।
ऐसी कल्पना उभरती है कि जब परमात्मा ने पूरी सृष्टि बना ली होगी, तमाम रंग बना लिये होंगे, तो तब मिसेज परमात्मा को बुलाकर वे रंग दिखाये होंगे। परमात्मा ने मिसेज परमात्मा से कहा होगा बताओ इन रंगों का क्या करें। मिसेज परमात्मा ने निश्चित तौर पर कहा होगा-इतने सारे रंगों की साड़ियाँ होनी चाहिए। सिर्फ इतने ही रंगों की क्यों, इन रंगों को मिक्स कर दिया जाये, फिर जितने किस्म के शेड बनें, उन सबकी साड़ियाँ होनी चाहिए।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :





