गलत गलत होता है, न वहाँ देर है, न अन्धेर

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूँ जो खूब सिगरेट पीते हैं, शराब पीते हैं, जो दिल में आता है खाते हैं और स्वस्थ रहते हैं।
गीत गाया पत्थरों ने : अजन्ता

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
यहाँ पत्थरों में सुनाई देता है संगीत। अनवरत संगीत। प्राणों को झंकृत कर देने वाला संगीत। जो अन्यत्र दुर्लभ है।
सैकड़ों साल हजारों कलाकारों की अनवरत तपस्या की परिणति है अजन्ता की गुफाएँ।
अजन्ता की गुफाओं में बनी कलाकृतियों में हजारों शिल्पियों के श्रम और साधना को महसूस किया जा सकता है।
चोरी का धन मोरी (नाली) में जाता है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
सुबह से उठ कर फोन पर लगा था। इसी चक्कर में आज जो लिखने का मन था, वो लिख नहीं पाया और जो लिख रहा हूँ उसे लिखने का मन नहीं। पर मैं भी क्या करूँ, पहले ही बता चुका हूँ कि रोज-रोज फेसबुक पर लिखना सिर्फ मेरे मन पर नहीं निर्भर करता। ये कोई और है जो मुझसे लिखवाता है, मैं निमित मात्र बन कर टाइप करता चला जाता हूँ।
दौलताबाद का किला : जिसे बेधना था मुश्किल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
देवगिरी यानी दौलतबाद का किला औरंगाबाद शहर से 11 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दुर्जेय पहाड़ी पर स्थित है।
आधी छोड़ पूरी धावे, न आधी पावे न पूरी पावे

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरे लिए नानी के घर जाने का मतलब सिर्फ परियों की कहानियाँ सुनना नहीं था।
खुल्ताबाद : औरंगजेब की मजार पर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मुगल बादशाह औरंगजेब ऐसा शासक रहा है, जिसका इतिहास में ज्यादातर नकारात्मक मूल्याँकन हुआ है। दिल्ली के इस सुल्तान की मजार है औरंगाबाद शहर से 30 किलोमीटर दूर खुल्ताबाद में। उसकी दिली तमन्ना थी कि उसे अपने गुरु के बगल में दफनाया जाये।
रिचार्ज का भन्डारा

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
मैंने एक पुण्यार्थी उद्योगपति से निवेदन किया कि मुफ्त का पानी पिलाना इस गरमी में बहुत पुण्य का काम है।
जीओ और जीने दो

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मुझे तो सुबह उठ कर अपनी पत्नी को धन्यवाद कहना ही चाहिए।
उसने मुझे कभी देर रात हाथ में कम्प्यूटर की स्क्रीन में झाँकने से नहीं रोका।
लेटे हुए हनुमान जी यानी भद्र मारुति

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
देश में बजरंग बली के लाखों मन्दिर होंगे, पर इनमें खुल्ताबाद का भद्र मारुति मन्दिर काफी अलग है।
भावे की हर बात भली, ना भावे तो हर बात बुरी

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज सोच रहा हूँ कि सु़बह-सु़बह आपसे वो बात बता ही दूँ जिसे इतने दिनों से बतान के लिये मैं बेचन हूँ।
हिन्दू, बौद्ध और जैन विरासत का संगम है एलोरा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
अगर आप देश का इतिहास, विरासत, संस्कृति से साक्षात्कार करना चाहते हों तो एलोरा से अच्छी कोई जगह नहीं हो सकती।
हर कर्म का प्रतिफल मिलता है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैंने कल लिखा था कि अगर मुझे किसी ने याद दिलाने की कोशिश की तो मैं हिटलर की उस कहानी का जिक्र जरूर करूंगा, जिसमें एक फौजी अफसर का बेटा कैसे अपने पिता के बनाए नर्क में फंस जाता है और फिल्म खत्म होने के कई महीनों बाद तक मेरी नाक में आदमी के जलने की दुर्गंध छोड़ जाता है।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :





