हार्ट का नया माडल

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
और, और, और, और लीजिये, पुराने भले ही अभी सिर्फ तीन महीने ही पुराना क्यों ना हो, नया ले ही लीजिये।
भाई की आँखों में चमक और बहन की आँखों में प्यार

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
माँ तीन दिनों के लिए पिताजी के साथ बाहर गई थी। मैं बिना माँ के एक दिन नहीं रह सकता था। माँ ने जाते हुए मुझसे दो साल बड़ी बहन को निर्देश दिया था कि संजू का ख्याल रखना। बहन चुपचाप खड़ी थी।
‘प्रेतलेखन’ और अनुवाद

सुशांत झा, पत्रकार :
मेरे एक मित्र ने पूछा कि 'प्रेत लेखन'(Ghost writing) की क्या कीमत होनी चाहिए? मैंने कहा, "प्रेत किसका है?" वो मुस्कुराया। मैंने कहा कि तुम्हारी मुस्कुराहट बताती है कि प्रेत मालदार है और अपना आदमी है।
प्रेम, नफरत, तन्हाई और मिलन

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
सुबह जब नींद खुले तो अपने भीतर झाँकिए। मन की खिड़िकियों से देखिए कि कहीं आप अकेले तो नहीं।
पूरी जिन्दगी एक धोखे में कट गयी

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कल जबसे मुरारी बापू का फोन आया कि संजय सिन्हा तुम बहुत अच्छी कहानियाँ लिखते हो, मैंने तुम्हारी तीनों किताबें पढ़ीं और अपनी कई कथाओं में तुम्हारा नाम लिया है, मेरे पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे।
हिमाचल के परवानू में पाँच दिन

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
परवानू हिमाचल प्रदेश का प्रवेश द्वार है। जब आप चंडीगढ़ से कालका होते हुए शिमला के लिए आगे बढ़ते हैं तो हरियाणा का कालका खत्म होने के बाद हिमाचल का पहला शहर परवानू ही पड़ता है। लिहाजा यह हिमाचल का प्रवेश द्वार है। हिमाचल सरकार ने यहाँ लोकनिर्माण विभाग का एक गेस्ट हाउस बनवा रखा है। वह साल 2000 का जून महीना था। मैं गुरु जांभेश्वर विश्वविद्यालय की एमएमसी की परीक्षा दे रहा था। मैंने अपना केंद्र चंडीगढ़ चुन रखा था। कुछ दिन अपने सीनियर साथी राजेश राठौर के घर में रहा। इसी दौरान हिमाचल के कुछ दोस्तों से परिचय हुआ था।
नकली जिन्दगी जीते हुए असली लोग

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आपको तो पता ही है कि मैं अभी पश्चिम बंगाल में तारापीठ मंदिर गया था। आपको ये भी पता है कि मैं वहाँ एक भाई-बहन से मिला था। आप ये भी जानते ही हैं कि उनकी कहानी सुनाने को मैं बेताब हूँ। पर आप ये नहीं जानते कि आख़िर उनकी कहानी मैं क्यों सुनाना चाहता हूँ?
अकिंचन देह में फास्फोरस

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
डाक्टर गंभीर किस्म के मेडिकल टेस्टों के बोल दे, तो दिमाग एक खास दशा में चला जाता है। गंभीर मेडिकल टेस्टों की डाक्टर बोल दे, तो मैं एकदम सन्यास मोड में चला जाता हूँ। देह नश्वर है, अकिंचन है, क्या रखा है। स्वस्थ रह कर ही कौन से तीर मार लेंगे, बीस-तीस साल और जी जायेंगे। सीरियस बीमारी हुई, बीस-तीस साल पहले टें बोल लेंगे। इस किस्म के निहायत जीवन-निरपेक्ष विचार आने लगते हैं।
कामयाबी की कहानी

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कायदे से मुझे आज आपको पश्चिम बंगाल में तारापीठ की यात्रा पर मिले उस मासूम की कहानी सुनानी चाहिए, जिससे मिल कर मेरा कलेजा फट गया। मुझे उसकी उस बहन से आपको मिलाना चाहिए, जिस बहन ने भाई की क्षण भर की खुशी में अपनी जिन्दगी को जी लिया। पर आज मेरी हिम्मत नहीं हो रही आपको वो कहानी सुनाने की। उस कहानी को लिखने के लिए मुझे पहले अपने आँसू पोंछने पड़ेंगे। मुझे अपने फटे कलेजे को समेटना पड़ेगा।
संपूर्णता मिलन में है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
उस 'येलेना' से मैं दुबारा नहीं मिल पाया, जिसकी मैंने चर्चा की थी। हालाँकि जब मैंने येलेना की कहानी आपको दुबारा सुनानी शुरू की थी, तब मैंने यही कहा था कि ताशकंद से लौटते हुए एयरपोर्ट पर नीली आँखों वाली जो लड़की मुझे मिली थी और जिसने मेरी मदद की थी, उसमें भी मुझे येलेना ही दिखी थी। चार दिन पहले मैंने येलेना की कहानी शुरू की थी और यह शुरुआत उसी मुलाकात के साथ हुई थी।
मन मोह लेती है मनाली की फिजाँ

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मनाली देश के बेहतरीन हिल स्टेशन में शामिल है। मुझसे अगर कोई किसी एक हिल स्टेशन को पहला नंबर देने को कहे तो मैं मनाली का ही नाम लूंगा। क्यों तो इसके कई कारण हैं। मनाली में घूमने को लेकर काफी विविधताएं हैं।
प्रेम रहित विवाह

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कल देवघर पहुँचा। भोलेनाथ के दर्शन किए।
फिर सारे रास्ते येलेना की कहानी पर आपके कमेंट पढ़ता रहा। सोचता रहा उस फिल्मकार के बारे में जिसने 'प्यासा' और 'कागज' के फूल जैसी फिल्में बनाई थीं। दोनों फिल्में फ्लॉप साबित हुई थीं।



आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
सुशांत झा, पत्रकार :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :





