चिंता की चिंता छोड़िए और मस्त रहिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरी बुआ ने यह कहानी मुझे सुनायी थी। डेल कारनेगी ने पढ़ाई थी। माँ ने अमल करना सिखाया था। पत्नी इस पर अमल कराती है।
अब इतना लिख दिया तो वो कहानी फिर से आपको सुना ही दूँ, जिसे आप कम से कम एक हजार बार सुन चुके होंगे।
अदभुत, अनूठा है गोबिंद बाग का लेजर शो

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
एक घंटे में पूरे सिख इतिहास की कहानी। दस गुरुओं की कहानी। बलिदान की कहानी।
गुमनामी बाबा ‘ नेताजी’ से एक यादगार मुलाकात

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
यह पोस्ट दो बरस पहले नेताजी की जयंती पर लिखी थी। पिछले दिनो नेताजी से जुड़ी गोपनीय फाइलों में दो के सार्वजनिक होने के बाद इस रहस्योद्घाटन से कि सुभाष बाबू के परिजनों की 1948 से 1968 तक तत्कालीन भारत सरकारें जासूसी कराती रहीं, देश मे हड़कंप मच गया है।
सीखने के लिए ईमानदारी जरूरी

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
एप्पल कम्प्यूटर, आईफोन, आईपैड और आईपॉड जैसे खिलौने पूरी दुनिया को देने वाले स्टीव जॉब्स अपने कॉलेज के दिनों में जब पहली बार यूँ ही भारत भ्रमण पर आए थे तो यहाँ के अध्यात्म को अपने साथ ले गये थे।
संचार और मनोरंजन के वो तमाम खिलौने, जिनसे पूरी दुनिया भविष्य में खेलने वाली थी, वो जिन दिनों स्टीव जॉब्स के दिल और दिमाग में आकार ले रहे थे, उस दौरान स्टीव एक दिन के लिए भी भारत के गौरवपूर्ण अध्यात्म को नहीं भूले।
श्री हुजुर साहिब (नांदेड़) की ओर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
अमृतसर से नांदेड़ को जोड़ती है दैनिक चलने वाली सचखंड एक्सप्रेस। बड़ी संख्या में हर रोज पंजाब के श्रद्दालु हुजुर साहिब के लिए इस ट्रेन से रवाना होते हैं। एक दिन दिल्ली से हम भी इस रेल के मुसाफिर बन गये।
माथेरन में देना पड़ता है प्रवेश शुल्क

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
माथेरन देश में एक ऐसा शहर है जहाँ हर सैलानी को प्रवेश शुल्क देना पड़ता है । आजकल हर बाहरी वयस्क के लिए 50 रुपये और बच्चों के लिए 25 रुपये ।
कब आयेगा बदलाव

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कल मुझे मेरी सोसायटी का माली मिल गया। उसके हाथों में ढेरों किताबें थीं। दुआ सलाम के बाद उसने मुझसे बीस हजार रुपये बतौर उधार मांगे।
जाहिर है मेरी जिज्ञासा ये जानने में थी कि आखिर अचानक इतने रुपयों की उसे क्या जरूरत आ पड़ी।
गुस्सा आये तो दस तक गिनती गिनो

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
पिताजी कभी - कभी कमरे में टहलने लगते और जोर - जोर से गुनगुनाते “श्री कृष्ण गोविंद, हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव!”
जब पिताजी ये वाला मंत्र जाप करते तो हम समझ जाते कि हमसे कोई गलती हुयी है और पिताजी को बुरा लगा है, लेकिन वो हम पर गुस्सा करने की जगह कमरे में टहलना शुरू कर देते और अपने भगवान को याद करने लगते - “श्री कृष्ण गोविंद, हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव!”
बड़ा होने पर मैंने पिताजी से पूछा कि मैं बचपन से आपको ऐसा करते देख रहा हूँ।
शाही गधे, शाही कचौड़ी

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
कसम से दिल बैठ जाता है, ऐसा बोर्ड देखकर - फलाँ शाही कचौड़ी की दुकान।
शाह ना बचे, सिर्फ कचौड़ियाँ बची रह गयी। एक दम फिलोसोफिकल किस्म की उदासी घेरने लगती है। शाहों से ज्यादा स्थायी तो कचौड़ियाँ निकलीं। एक ही सड़क पर चौदह दुकानें शाही कचौड़ियों की।
तीन मूर्ति भवन : यहाँ विराजती है दिलकश हरियाली

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
दिल्ली का तीन मूर्ति भवन। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का निवास स्थान। नेहरू जी के बाद को संग्रहालय और पुस्तकालय में परिणत कर दिया गया है।
रिश्तों को समझो, नहीं तो जीवन शाप लगेगा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैं कोई ज्योतिष नहीं हूँ, लेकिन मैं भविष्यवाणी कर सकता हूँ।
यह मेरी भविष्यवाणी है कि अगले कुछ वर्षों में आदमी इच्छा मृत्यु के शाप से ग्रस्त हो जायेगा।
कोई वादा किया हैं तो पूरा कीजिए

विकास मिश्रा, आजतक :
एक आदमी ने नारियल के पेड़ पर ढेर सारे फल लगे देखा तो जोश में पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ बहुत ऊंचा था, लेकिन उस आदमी के जोश से थोड़ा कम। उसने नारियल तोड़ कर नीचे फेंके और जब उतरने की बारी आयी तो नीचे देखा तो डर के मारे काँपने लगा।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
विकास मिश्रा, आजतक :





