Thursday, March 12, 2026
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रिश्ते हैं, लेकिन कोई रिश्ता बचा नहीं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

कई साल पहले एक रात हमारे घर की घंटी बजी। 

तब हम पटना में रहते थे। आधी रात को कौन आया?

पिताजी बाहर निकले। सामने दो लोग खड़े थे। एक पुरुष और एक महिला।

दिल्ली 1975 : मेरा खोया बचपन

पुण्य प्रसून बाजपेयी, कार्यकारी संपादक, आजतक :

जैसे ही घुमावदार रिहाइश गलियों के बीच से निकलते हुये मुख्य सड़क पर निकलने को हुआ वैसे ही सामने टैगौर गार्डन केन्द्रीय विद्यालय का लोहे का दरवाजा इतने नजदीक आ गया कि वह सारे अहसास झटके में काफूर हो गये, जिन्हें सहेज कर घर से निकला था।

बीसीसीआई आज जहाँ है मीडिया की वजह से पर इतना अहंकार और इतनी कृतघ्नता!!

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :

सात तारीख से आईपीएल लीग का आठवाँ संस्करण रंगारंग उद्घाटन समारोह के साथ शुरू होने जा रहा है। विश्व कप सम्पन्न हुए एक पखवाड़ा भी नहीं बीता होगा कि टी-20 का झमाझम सामने है, लेकिन आपको यदि खेल देखना है तो फिर अधिकृत ब्राडकास्टर चैनल का ही आपको सहारा है।

मौके का दाँव लगा तो टैलेंट दिखा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

पहली बार जब मैं ट्रेन में सफर कर रहा था तब पिताजी के साथ सबसे ऊपर वाली बर्थ पर बैठा था। 

हंसों से सीखें रिश्ते निभाना

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

आपने कभी हंसों को उड़ते हुए देखा है? 

पौराणिक कहानियाँ जीवन की पाठशाला हैं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

आदमी चाहे तो किसी एक कण से भी जिंदगी में बहुत कुछ सीख सकता है। 

मैंने बचपन में सुनी और पढ़ी तमाम कहानियों में से हाथी और मछली की कहानी को जीवन के सार-तत्व की तरह लिया। हालाँकि वहाँ तक पहुँचने के लिए मुझे राजा यदु और अवधूत की मुलाकात की कहानी भी माँ ने ही सुनायी थी।

अदभुत, अकल्पनीय, अनिंद्य, अभिराम है मुगल गार्डन

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

भारत के राष्ट्रपति के निवास स्थान राष्ट्रपति भवन के परिसर में स्थित है मुगल गार्डन। ये बागीचा साल में सिर्फ एक महीने ही आम जनता के लिए खोला जाता है।

रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून

विकास मिश्रा, आजतक  : 

इलाहाबाद में जब पढ़ता था तो शुरुआत में केपीयूसी हॉस्टल में रहा। पीने का पानी भरने के लिए नीचे जाना पड़ता था। मटके में पानी भरकर रखते थे, लेकिन कई बार झंझट से बचने के लिए टंकी का पानी पी लिया करते थे। ये सिर्फ मेरी ही बात नहीं थी, ज्यादातर लोग टंकी का ही पानी पीते थे।

थाली साफ करना

विकास मिश्रा, आजतक  : 

मेरे पिताजी खाने की थाली में कुछ नहीं छोड़ते। खाने के बाद थाली बिल्कुल साफ। अगर परोसने में रोटी जमीन पर गिर जाती है तो उसे उठाकर वे थाली में रख लेते हैं।

कैसे पड़ा दिल्ली नाम

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार: 

देश की राजधानी दिल्ली। कभी इसका नाम इंद्रप्रस्थ था। कभी शाहजहानाबाद। पर दिल्ली का नाम दिल्ली कैसे पड़ा, इस बारे में कई कहानियाँ हैं। कहा जाता है कि फारसी शब्द दहलीज से दिल्ली नाम पड़ा। विदेशी इसे भारत की दहलीज मानते रहे।

मृत्यु अटल है, जीवन सकल है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

आज आपको एक न में ले चलता हूँ। 

अपने जीवन में मुझे एक बार ओशो से मिलने का मौका मिला।

लोग क्या कहेंगे

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन : 

समाज में लोग क्या कहेंगे - सबसे बड़ी समस्या है। कुछ भी करो मना करना हो तो सबसे साधारण पर सबसे लचर दलील यही है। इसलिए रेडियो सिटी 91.1 एफएम ने जब अक्षय और जीनत का मामला उठाया तो मुझे लगा अब हो गया लोग क्या कहेंगे - का इंतजाम।

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