तोड़ो नहीं, जोड़ो

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
पिछले साल मैं अमृतसर में वाघा बॉर्डर गया था। वाघा बॉर्डर पर हर शाम एक खेल होता है। देशभक्ति का खेल।
वहाँ अटारी सीमा पर शाम के पाँच बजे भारत और पाकिस्तान दोनों मुल्कों के गेट खुलते हैं और दोनों देशों के सैनिक अपने सैन्यबल का प्रदर्शन करते हैं।
धन्य किहिन विक्टोरिया जिन्ह चलाईस रेल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
धन्य किहिन विक्टोरिया जिन्ह चलाईस रेल, मानो जादू किहिस दिखाइस खेल...
रणछोड़ ही असली योद्धा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
एक ठाकुर साहब थे। ठाकुर साहब की घनी-घनी मूंछें थीं।
सयाजीराव गायकवाड़ का बड़ौदा शहर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गुजरात का बड़ौदा शहर। अब इसका नाम बदलकर कागजों में वड़ोदरा हो गया है। पर ऐतिहासिक रूप से ये बड़ौदा है। लोग आम बोलचाल में उच्चारित करते हैं बरोदा। तो आप वड़ोदरा और बड़ौदा को एक ही समझें। बड़ौदा मैं पहुँचा दूसरी बार तो नेशनल हाईवे नंबर आठ से मुंबई की ओर से।
दुश्मन को अपना बनायें

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
ये कहानी मैंने नहीं लिखी। कहीं सुनी थी, लेकिन इसमें संदेश इतना अच्छा छिपा था कि आपसे साझा किए बिना नहीं रह पाऊंगा।
एनएच 8 पर सूरत से बड़ौदा वाया गोल्डेन ब्रिज

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
कोसांबा जंक्शन से मुझे बड़ौदा जाना था। मैंने आगे की यात्रा ट्रेन के बजाये बस से करने की सोची। क्योंकि इस मार्ग पर मैं ट्रेन से तो कई बार आवाजाही कर चुका था। कोसांबा में लोगों ने बताया कि भरुच की तरफ जाने वाली गाड़ियाँ हाईवे से मिलेंगी।
जुबाँ से दिये जख्म जिन्दगी भर नहीं भरते

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरी एक परिचित किसी को कुछ भी कह सकती हैं। वो स्पष्टवादी हैं। उन्हें किसी को कुछ भी कह देने में कोई गुरेज नहीं है।
वो कोई भी बात कहने के बाद कहती हैं, “माफ कीजिएगा, मैं साफ बोलती हूँ।
सरपट मंजिल तक पहुँचाती हैं मेमू और डेमू

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
महानगरों में चलने वाली ईएमयू यानी इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट का बदला हुआ रूप है मेमू ट्रेन सेवा। मेमू यानी मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (Mainline Electric Multiple Unit) । ऐसी रेलगाड़ियाँ महानगरों से छोटे शहरों के बीच चलाई गयी हैं।
अकबर को क्या जरूरत पूजा करने की!

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कुछ दिन पहले मैं अमिताभ बच्चन से मिलने उनके दिल्ली वाले घर में गया था। पहले भी कई बार जा चुका हूँ, लेकिन इस बार जब मैं उनसे मिलने गया तो मुझे उनके साथ कहीं जाना था। मैं ड्राइंग रूम में बैठ कर चाय पी रहा था, अमिताभ बच्चन तैयार हो रहे थे।
अनुष्का के कंधों पर एनएच10 (NH10)

नीरज गुप्ता, राष्ट्रीय ब्यूरो चीफ, आईबीएन 7 :
‘आदमी कुत्ते होते हैं और औरतें बिल्लियाँ’... अनुष्का शर्मा की NH10 खत्म होते-होते जनसत्ता में बरसों पहले पढ़ी प्रियदर्शन साहब का यह लेख मेरे जेहन में टहलने लगा। लेख का लब्बोलबाब यूँ कि कुत्ता आप पर भौंकता-गुर्राता है।
भरोसे की नाव पर चलते हैं ‘रिश्ते’

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
माइक्रोस्कोप से मेरा पहला पाला दसवीं कक्षा में पड़ा था। मेरे टीचर ने मुझे वनस्पति शास्त्र की पढ़ाई में पहली बार प्याज के एक छिलके को माइक्रोस्कोप में डाल कर दिखाया था कि देखो माइक्रोस्कोप में ये कैसा दिखता है।
गाँधी जी को गिरफ्तार करने के लिए रुकी फ्रंटियर मेल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
चार-पाँच मई 1930 की दरम्यानी रात। ब्रिटिश सरकार चुपके से गाँधी जी गिरफ्तार करती और उन्हें आगे ले जाने के लिए फैसला होता है रेलगाड़ी से। नवसारी के पास कराडी में पंजाब प्रांत से मुंबई जाने वाली फ्रंटियल मेल को रात में रोक लिया जाता है।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :





