आप : गतांक से आगे का आख्यान

सुशांत झा, स्वतंत्र पत्रकार :
यह एक व्यंग्य है, कृपया तथ्य ढूंढेंगे तो आपकी हालत योगेंद्र यादव सी हो सकती है!
केजरी और यादव-भूषण झगड़े का जोड़ हमारे महान इतिहास-पुराण में जरूर कहीं न कहीं होगा।
दमन का शानदार पुर्तगाली किला, चर्च और रिजार्ट

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मोटी दमन में स्थित है दमन का विशाल पुर्तगाली किला। देश के ज्यादातर किलों को दर्शनीय स्थलों में तब्दील कर दिया गया है, पर दमन के इस 400 साल से ज्यादा पुराने किले में अब इसमें दमन संघीय सरकार के तमाम सरकारी दफ्तर संचालित किये जाते हैं।
नानी दमन और मोटी दमन

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गुजरात के वापी शहर के पास दमन केंद्र शासित प्रदेश है। कभी गोवा दमन और दीव मिलकर एक प्रदेश हुआ करते थे, पर गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद दमन और दीव अब केंद्र शासित प्रदेश हैं। हालाँकि दमन और दीव के बीच 700 किलोमीटर की दूरी है, पर दोनों का प्रशासन एक ही है।
दो राज्यों का प्रवेश द्वार है वापी शहर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गुजरात का एक शहर वापी। वैसे तो जिला मुख्यालय भी नहीं है, पर इसका अपना महत्व है। यह हमारे देश के दो राज्यों का प्रवेश द्वार है। वापी रेलवे स्टेशन से एक तरफ निकलें तो दादरा नगर हवेली की ओर जा सकता हैं, वहीं दूसरी ओर निकलें तो दमन जा सकते हैं।
अपने-अपने रिश्तों का बोध होना चाहिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
पत्नी धीरे से आकर कान में फुसफुसाई कि शायद वो माँ बनने वाली है।
ट्रेन की रफ्तार बहुत तेज थी। मैं ऊपर बर्थ पर लेट कर किताब पढ़ रहा था।
रिश्तों का गुलदस्ता

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैं कल्पना के संसार में जीता हूँ। मैं कल्पना के संसार में ही जीना चाहता हूँ। मैं हर रोज एक काल्पनिक कहानी लिखता हूँ।
वक्त के साथ बदलता सिलवासा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मुख्य द्वार से प्रवेश करने के बाद सिलवासा की ओर जाती हुई सड़क का सौंदर्य मनमोह लेता है। दोनों तरफ हरियाली और आगे बढ़ते रास्ते। टाउन हाल से लगा हुआ चौराहा सिलवासा शहर की धड़कन है। इसी चौराहे के आसपास राजधानी सिलवासा के तमाम दफ्तर हैं।
पर्यावरण बचाने का संदेश देती है बिलिमोरा वघई लाइन

विद्युत प्रकाश मौर्य :
अंबिका नदी के तट पर बसे नवसारी जिले के शहर बिलिमोरा से दिन भर में दो ही नैरोगेज रेलगाड़ियाँ वघई के लिए खुलती हैं, जो आपको गुजरात के एकमात्र हिल स्टेशन सापूतारा की ओर ले जाती हैं।
पुराना छूटेगा, नया मिलेगा

संजय सिन्हा :
गोपियाँ कन्हैया से मनुहार कर रही थीं, “कान्हा हमारे कपड़े लौटा दो।”
बंदरगाह को जोड़ती थी बिलीमोरा-वघई नैरोगेज लाइन

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गुजरात में एक और नैरोगेज रेल संचालन में है बिलीमोरा जंक्शन और वघई के बीच। ये लाइन इस मायने में ऐतिहासिक है कि ये बड़ौदा रियासत के एकमात्र बंदरगाह बिलीमोरा को शेष गुजरात से जोड़ती थी। दोनों स्टेशनों के बीच एक जोड़ी ट्रेनों का रोज संचालन होता है।
एक और सुस्त ट्रेन – कौसंबा-उमरपाडा नैरोगेज

विद्युत प्रकाश मौर्य :
गुजरात के सूरत जिले में एक और सुस्त नैरोगेज ट्रेन सौ साले से अधिक समय से चल रही है। ये गुजरात में तीसरा नैरोगेज नेटवर्क जो संचालन में है वह है कोसंबा उमरपाडा के बीच। कोसांबा सूरत जिले का एक छोटा व्यापारिक शहर है। वहीं उमरपाडा सूरत जिले का ही एक तालुका है।
साइकिल भी ट्रेन से चलती है तेज

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गुजरात में दभोई-मियागाम के अलावा गुजरात में प्रतापनगर (वड़ोदरा) और जांबुसार जंक्शन और कोसांबा उमरपाडा, बिलिमोरा वाघाई के बीच अभी भी नैरोगेज रेल नेटवर्क संचालित हो रहा है। प्रतापनगर से जंबुसार नैरोगेज रेलवे लाइन की कुल लंबाई 51 किलोमीटर है।



सुशांत झा, स्वतंत्र पत्रकार :
विद्युत प्रकाश मौर्य,
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 





