भारत का मैनेचेस्टर लुधियाना

विद्युत प्रकाश :
(पहियों पर जिंदगी 16)
14 अक्तूबर 1993 – लुधियाना। मंडी गोबिंदगढ़ से ट्रेन रात को 10 बजे चल पड़ी। थोड़ी देर में पंजाब का सबसे बड़ा शहर लुधियाना आ गया।
लोहा मंडी यानी मंडी गोबिंद गढ़

विद्युत प्रकाश :
(पहियों पर जिंदगी 15)
13 अक्तूबर 1993 – दोपहर के भोजन के बाद हमारी ट्रेन नंगल से आगे बढ़ गयी। ट्रेन दिन में एक शहर से दूसरे शहर का सफर कम ही करती है। पर आज थोड़ी सी यात्रा दिन में ही है।
आओ चलें पिंजौर

विद्युत प्रकाश :
(पहियों पर जिंदगी 13)
12 अक्तूबर 1993 - चंडीगढ़ के अखबारों में सदभावना यात्रा की बड़ी बड़ी खबरें और तस्वीरें छप रही हैं। पंजाब केसरी, ट्रिब्यून जैसे अखबारों के अलावा खासकर एक्सप्रेस न्यूज लाइन में आधे पेज से ज्यादा की कवरेज है।
चंबल की जीवनधारा है श्योपुर पैसेंजर ट्रेन

विद्युत प्रकाश :
ग्वालियर से श्योपुर के बीच चलने वाली ये छोटी लाइन की ट्रेन इलाके लोगों की जीवन धारा है। ग्वालियर से चल कर 28 स्टेशनों से होकर गुजरने वाली ये ट्रेन इलाके 250 से ज्यादा गाँवों के लिए लाइफ लाइन है।
ये है देश की सबसे लंबी लाइट रेलवे

विद्युत प्रकाश :
मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में चलती है देश की सबसे कम चौड़ाई वाली पटरी की स्पेशल गेज ट्रेन। इसकी दूसरी खास बात ये है कि ये देश की सबसे लंबी दूरी की लाइट रेलवे है जो अभी संचालन में हैं।
जब चिड़िया का दाना नहीं लौटाया पेड़ ने
चित्र : राजेंद्र तिवारी[/caption]
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
बहुत छोटा था तो माँ अपने साथ सुलाते हुए उस चिड़िया की कहानी सुनाती थी, जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फँस गया था। चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया वह दाना लौटा देने के लिए।
सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ में

विद्युत प्रकाश :
तारीख बदल गयी है। 10 अक्तूबर 1993 रात के 12 से कुछ ज्यादा बजे हैं। ट्रेन अंबाला से चलकर कब चंडीगढ़ पहुँच गयी पता ही नहीं चला। अंबाला चंडीगढ़ के बीच 50 किलोमीटर से भी कम की दूरी है। ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर रूकी।
देश में पहली ट्राम सेवा मुंबई में
कराची की सड़कों पर ट्राम।[/caption]
विद्युत प्रकाश :
देश की पहली ट्राम मुंबई में 1873 में परेल से कोलाबा के बीच चली थी। इस ट्राम को 6 से 8 घोड़े खींचा करते थे। मुंबई में ट्राम सेवा को खींचने के लिए 900 घोड़े अस्तबल में बहाल किए गये थे। बाद में ट्राम सेवा महाराष्ट्र के नासिक शहर में भी शुरू की गयी थी लेकिन ये 1933 में बंद कर दी गयी।
कभी दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती थी ट्राम

विद्युत प्रकाश :
आज भले ही दिल्ली में मेट्रो रेल का विशाल नेटवर्क है, पर कभी दिल्ली की सड़कों पर ट्राम दौड़ा करती थी। दिल्ली की सड़कों पर 1908 में पहली बार ट्राम दौड़ी थी। ब्रिटिश काल में तमाम बड़े शहरों में शहरी परिवहन के लिए ट्राम सेवा का चयन किया गया था।
महाराष्ट्र में चलती थी 326 किलोमीटर लंबी बारसी लाइट रेल

विद्युत प्रकाश :
पश्चिमी भारत में बारसी लाइट रेलवे अब अस्तित्व में नहीं है, पर ये किसी जमाने में 325 किलोमीटर लंबी नैरो गेज रेलवे लाइन हुआ करती थी। महाराष्ट्र में लातूर से मिराज के बीच रेलवे लाइन बनाने के लिए बारसी लाइट रेलवे (बीएलआर) नामक कंपनी की स्थापना लंदन में हुई।
गर आपके घर आकर ईद मनायें तो?

विनीत कुमार, मीडिया आलोचक :
मयूर विहार में वो मेरी एक्सक्लूसिव और आखिरी मेड थी। वो मजाक में कहा करती - भइया, आप हमको काम करने के नहीं, बात करने के पैसे देते हो? बताओ, हमको खाना टाइम से बनाना चाहिए तो आते ही चाय बना कर मेरे साथ चाय पीने लग जाते हो।
काँगड़ा रेल – 933 पुल 484 मोड़ और 164 किलोमीटर का सफर

विद्युत प्रकाश :
काँगड़ा घाटी रेल लाइन की लंबाई 164 किलोमीटर है। काँगड़ा घाटी रेल रेल मार्ग में दो सुरंगें हैं। जिनमें से एक 250 फुट लंबी और दूसरी 1,000 फुट लंबी है। ट्रेन 2 फीट 6 इंच चौड़ाई वाले पटरियों पर कुलांचे भरती है। इस लाइन का सबसे ऊँचा प्वाइंट आहजू रेलवे स्टेशन पर है जो 3901 फीट ऊँचा है।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विनीत कुमार, मीडिया आलोचक :





