चंबा से वापसी वाया कमेरा लेक

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
तीन दिनों के चंबा प्रवास के बाद वापसी की यात्रा भी काफी मनोरम रही। हमारा होटल चंबा बस स्टैंड से पाँच किलोमीटर आगे परेल में था। इसलिए हमें बस पकड़ने के लिए बस स्टैंड जाने की कोई जरूरत नहीं थी। टाइम टेबल देख लिया था।
रिश्तों में जरूरी होता है भाव को समझना

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
दो दिनों से प्रेम पर लिख रहा हूँ।
क्या हो गया है मुझे?
जेठानी को जलाना है

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
सरकार चाहती है कि सोने में भारतीय लेडीज की दिलचस्पी कम हो। इसलिए इन दिनों गोल्ड बांड के इश्तिहार आ रहे हैं, आशय यह कि गोल्ड के चक्कर में ना पड़ों कुछ ब्याज कमा लो। सोना सरकार को दे दो, वहाँ ज्यादा काम आयेगा। यह चाहना कुछ इस किस्म का चाहना है कि मानो महाराष्ट्र में शिव सेना के उध्दव ठाकरे चीफ मिनिस्टर कुर्सी की चाह खत्म कर दें। सोने को लेकर सरकार की योजना है कि पुराने सोने को लेकर बांड जारी कर दिये जायें और पब्लिक को प्रोत्साहित किया जाये कि सोना ना खरीदो- सोने के बांड खरीद लो, उस पर ब्याज भी मिलेगा।
चंबा का शॉल, रुमाल और जूतियाँ

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
चंबा अपने शॉल, रुमाल और जूतियों के लिए जाना जाता है। अगर आप चंबा से कुछ खरीद कर ले जाना चाहते हैं तो इनमें से कुछ चुन सकते हैं। सबसे पहले बात चंबा के रुमाल की। चंबा का रुमाल वास्तव में कोई जेब में रखने वाला रुमाल नहीं होता। वास्तव में यह शानदार कढ़ाई की हुई वाल पेटिंग होती है।
किसी और में खुद को देख पाना ही प्रेम है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आप में से बहुत से लोग इंग्लैंड गये होंगे। मैं भी गया हूँ।
पर आज कहानी न तो आपकी लिखी जा रही है, न मेरी। आज कहानी लिख रहा हूँ उस नौजवान की, जिसे अंग्रेजी नहीं आती थी पर उसे इंग्लैंड जाना था। उसका पासपोर्ट बन चुका था, वीजा लग चुका था। अब बस उड़ना भर बाकी था।
एटीएम और औकात

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
एटीएम औकात पहचानता है-उस दिन मैंने पाँच सौ रुपये एटीएम से निकाले, तो सौ-सौ के पाँच नोट निकले। यह नहीं कि एटीएम पाँच सौ का नोट निकाल देता। एटीएम सोचता है कि पाँच सौ रुपये के लिए मेरे होल में आया यह बंदा, एक झटके में ही पाँच सौ खर्चने की औकात और जरूरत ना होगी इसकी, सौ-सौ के नोट ही देना बेहतर। वरना पाँच सौ के छुट्टे कराने में और परेशान होगा।
प्रेम करना नहीं होता, उसे बस जीना होता है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
एक नौजवान ने मुझसे गुहार लगायी है कि मैं उसकी समस्या को ध्यान से समझूं और फिर उसका हल बताऊं। उसने मुझ पर लानत भेजी है कि मैं सिर्फ सास-बहू, पति-पत्नी और आदमी से आदमी के रिश्तों की कहानियाँ लिखता हूँ। और जिस दिन खुश होता हूँ, अपनी प्रेम कहानी लिख देता हूँ। पर आज की नयी पीढ़ी की समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता।
माँ चामुंडा के चरणों में बसा है चंबा शहर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
चामुंडा मंदिर के बारे में कहा जाता है कि चंबा नगर बसने से पहले भी विद्यमान था। वर्तमान मंदिर मूल मंदिर के नष्ट होने के बाद बनाया गया है। सारा चंबा शहर माँ चामुंडा के चरणों में बसा हुआ है। मंदिर भित्ति चित्र और काष्ठकला का अदभुत उदाहरण है। चामुंडा मंदिर पैगोडा शैली में बना हुआ है। यह चंबा के बाकी मंदिरों से काफी अलग है।
अपना लाइक उर्फ अपनी लाइफ

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
किसी वेबसाइट से खरीदारी करनेवाले जानते हैं कि कोई आइटम वहाँ से खरीदकर लौटना आसान नहीं होता, खरीदारी के फौरन बाद वेबसाइट बताती है कि जिन्होने आप जैसे ये सामान खऱीदा था, उन्होने ये, ये और ये भी खरीदा था, ये, ये आइटम लाइक किये थे।
एक कटोरी खीर है रिश्तों का पैगाम

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
एक कटोरी खीर की कीमत तुम क्या जानो दीप रानी?
एक कटोरी खीर सिर्फ चावल, दूध और चीनी का मिश्रण भर नहीं। यह दोस्ती की सौगात होती है, यह रिश्तों का पैगाम होता है।
झुमार का जम्मू नाग मंदिर – खजिनाग के बड़े भाई जम्मू नाग

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हिमाचल और जम्मू कश्मीर में नाग मंदिरों की बड़ी श्रंखला है। पहाड़ों पर कहावत है 18 नारायण और 18 नाग। यानी बहुत सारे नारायण और बहुत सारे नाग। इसे 18 से इसलिए जोड़ते हैं क्योंकि यह एक पवित्र अंक है। हिमाचल प्रदेश में जगह-जगह नाग मंदिर हैं। नाग देवता की पूजा की परंपरा अति प्राचीन है। हो सकता है यह परंपरा उस काल से चली आ रही हो जब इंसान कबीलों में रहता था। इन नागों में बासुकि नाग सबसे बड़े माने जाते हैं। बासुकि नाग का एक मंदिर कांगड़ा में मैकलोड गंज के पास है।
झुमार – ताल से ताल मिला….

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हिमाचल में चंबा के पास झुमार पहुँच जाना यूँ लगता है जैसे सपनों की दुनिया में आ गए हों। झुमार चंबा शहर से 14 किलोमीटर की दूरी पर है। रास्ता लगातार चढ़ाई वाला है। पर जब आप झुमार पहुँचते हैं तो मौसम काफी बदल चुका होता है। यह एक ग्रामीण इलाका है जहाँ दूर-दूर तक हरियाली, सेब, चीड़ और देवदार के पेड़ दिखायी देते हैं। झुमार का नैसर्गिक सौंदर्य फिल्मकार सुभाष घई को इतना भाया कि उन्होंने अपनी सुपर हिट फिल्म ताल की आधी शूटिंग झुमार में की। 1999 में आयी इस फिल्म में चंबा का सौंदर्य निखर कर आया है। झुमार में जो सेब का बाग है उसका नाम ही ताल गार्डेन रख दिया गया है।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :





