Tuesday, March 17, 2026
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गुणकारी बेल का शरबत

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

गर्मी की तपिश से बचने के लिए आपने बेल का शर्बत तो जरूर पिया होगा। इसकी तासीर ठंडी होती है। बेल के पत्तों की तासीर भी ठंडी होती है इसलिए भगवान शिव को बेल और बेल के पत्ते अर्पित किए जाते हैं।

लोटा से लौटकर

रवीश कुमार, वरिष्ठ टेलीविजन एंकर :

लोटा। हमारे यहाँ कहावत तो है लोटा लेकर मैदान की तरफ़ भागने का मगर आज हम मैदान छोड़कर लोटा की तरफ़ भागे। सात बजे सुबह तैयार होकर ऐसे निकला जैसे दफ्तर जाना हो।

रसगुल्ले के आविष्कारक एन सी दास

विद्युत प्रकाश :

रसगुल्ले का आविष्कार किसने किया। जवाब है नबीन चंद्र दास। रसगुल्ला वह बंगाली मिठाई है जो अब देश काल की सीमाएँ लांघकर दुनिया भर में लोकप्रिय है।

शुद्ध जल पीयें स्वस्थ रहें

माधवी रंजना :

यह माना जाता है कि 80% तक बीमारियाँ पानी के इन्फैक्सन से ही होती हैं। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि स्वच्छ पानी पीया जाये। सभी विकसित देशों के लोग स्वच्छ पानी को लेकर काफी जागरुक हैं।

ऊर्जा का बड़ा स्रोत – रागी यानी फिंगर मिलेट

विद्युत प्रकाश :

कैल्शियम, लोहा और प्रोटीन से भरपूर रागी से आटा बनता है। यह साबूत अनाज होता है, जिससे अधिक तृप्ति (फाइबर से) भी मिलती है।

कैसा हो सुबह का नाश्ता

माधवी रंजना :

भारत विविधताओं का देश है। यहाँ हर प्राँत में सुबह भी अलग अलग तरीके से होती है। अब आप सुबह के नाश्ते को ही लीजिए तो पंजाब में कुछ और बात है बिहार में कुछ और तो दक्षिण भारत में कुछ और।

जब शाहरुख ने फिल्म निर्माता से माँगा मकान

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

मैं अभी दिल्ली में जिस फ्लैट में रहता हूँ, उसके बारे में मेरी पत्नी को लगता है कि छोटा है। मुझे लगता है कि ढाई लोगों के परिवार में तीन बेड रूम कम तो नहीं! उपर से ठीक-ठाक आकार का ड्राइंग-डाइनिंग रूम भी है, बड़ी-सी बॉलकनी है, लंबी चौड़ी छत है, घर के नीचे बीएमडब्लू है। लेकिन मेरी पत्नी को फिर भी लगता है कि मकान तो और बड़ा होना चाहिए। कितना बड़ा, यह नहीं पता। 

बच्चों की इच्छा बनाम खलनायक पिताजी

विकास मिश्रा, आजतक :

आठवीं या नौवीं में पढ़ रहा था। पिता जी के साथ शहर के बाजार में गये। मेरा मन एक चश्मे पर आ गया। मैंने खरीदने की जिद की, पिताजी ने मना कर दिया। मेरा ख्याल था कि चश्मा पहनकर हीरो लगूँगा।

कोई नहीं कर सकता संपूर्ण सच का सामना

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक : 

जितनी बार मेरी मुलाकात राजीव खंडेलवाल से होती है, मुझे लगता है कि आदमी को कभी न कभी 'सच का सामना' करना ही चाहिए। राजीव की पहचान टीवी शो 'सच का सामना' से बनी थी, और फिर उनकी एक दो फिल्में भी आयीं।

ऐ राजा बनारस!

रवीश कुमार, वरिष्ठ टेलीविजन एंकर :

रोज देखा जाने वाला, कहा जाने वाला, सुना जाने वाला लिखा जाने वाला और इन सबसे ऊपर जीया जाने वाला शहर है। इसकी इतनी परिभाषाएँ और व्यंजनाएँ हैं कि यह शहर हर लफ्ज के साथ कुछ और हो जाता है।

बनारस क्लब

रवीश कुमार, वरिष्ठ टेलीविजन एंकर :

बनारस क्लब गया था। डाक्टर नमित, शिप्रा और बालक शुभम के साथ। शानदार शाम रही। 1848 का यह क्लब है।

सत्ता को याद नहीं जानकी नवमी

सुशांत झा, स्वतंत्र पत्रकार :

आज जानकी नवमी है यानी सीता का जन्मदिन। जातीय स्मृति में यह दिन भले ही पौराणिक काल से रहा हो, लेकिन (सत्ता) व्यवस्था उसे भूल जाना चाहती है। किसी बड़े नेता का कोई शुभकामना संदेश नहीं आया - शायद नरेंद्र मोदी का भी नहीं!

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