शुभस्थ शीघ्रम्

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मुश्किल ये है कि हम लोग अपनी जिन्दगी एक धारणा पर जीते चले जाते हैं। हम मान लेते हैं कि जो अच्छा है, उसी की बातें सुननी हैं। हम बहुत सी उन विद्याओं पर अमल नहीं करते, जिनके विषय में हमारे मन में बुरी भावनाएँ होती हैं, या जिनकी छवि ठीक नहीं होती।
सबसे अभागा वो आदमी जिसके पास रिश्ते नहीं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरे दफ्तर में काम करने वाली एक महिला ने कल अपना इस्तीफा सौंप दिया। वो मुझसे मिलने आयी थी और बता रही थी कि उसे बहुत अफसोस है कि वो नौकरी छोड़ कर जा रही है, पर मजबूरी है।
मैंने उससे पूछा कि ऐसी क्या मजबूरी है?
जिन्दगी अपनी पसंद की होनी चाहिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
बेटे ने जिद पकड़ ली थी कि उसे डायनासॉर वाला खिलौना चाहिए।
डायनासॉर वाला खिलौना बच्चों की पसंद बना हुआ था। वो बैट्री से चलता था, कुछ दूर चल कर रुकता और फिर मुँह से अजीब सी आवाज निकाल कर धुआँ छोड़ता।
चंपावती के नाम पर पड़ा चंबा शहर का नाम

चंपावती के नाम पर पड़ा चंबा शहर का नाम
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
विख्यात कलापारखी और डच विद्वान डॉ. बोगल ने चम्बा को 'अचंभा' कहा था। उन्होंने यू हीं शहर को अचंभा नहीं कहा था। यहां के मंदिर कला संस्कृति में विविधता को देखते हुए उन्होंने अनायास ही यह उपाधि दे डाली थी। वैसे चंबा शहर का नाम चंबा के राजा के बेटी चंपावती के नाम पर पड़ा था।
रिश्तों की फसल लहलहाएगी

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कानपुर में मेरे एक ताऊजी रहते थे। बड़ा सा बंगला था और पूरा परिवार संयुक्त रूप से रहता था। दद्दा, ताऊजी, ताईजी, उनके बच्चे। इत्तेफाक से मेरी बड़ी मौसी भी उनके पड़ोस में ही रहती थीं। मौसी के साथ उनकी देवरानी भी थीं। तो इस तरह ताऊजी के बच्चे, मेरी मौसी के बच्चे और मौसी की देवरानी के बच्चे सब साथ पल रहे थे।
डॉर्लिंग कह कर हाल पूछिए, प्यार का जोड़ टूटेगा नहीं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कल दफ्तर में काम अधिक था। घर पहुँचने में देर हो गयी। हो सकता है कि पत्नी मन ही मन नाराज भी हो रही हो कि मैं सारा दिन दफ्तर में गुजार देता हूँ और इस चक्कर में दिल्ली के सभी मॉल्स में जो सेल लगी है, उसमें उसे नहीं ले जा पा रहा।
चंबा का लक्ष्मीनारायण मंदिर समूह

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हिमाचल प्रदेश का छोटा सा शहर चंबा मंदिरों का नगर है। वैसे चंबा के आसपास कुल 75 प्राचीन मंदिर हैं। छोटे से शहर में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के कई मंदिर हैं। इन मंदिरों में प्रमुख है लक्ष्मीनारायण मंदिर समूह। यह चंबा शहर का सबसे विशाल मंदिर समूह है।
प्यार में पड़ी लड़की हजार मर्दों से अधिक शक्तिशाली

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैंने जितनी बार भी फिल्म देवदास देखी है, मेरे मन में ये सवाल उठा है कि पुरुष प्रेम में कायर क्यों हो जाता है?
जो हुआ अच्छा हुआ, जो होगा अच्छा होगा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
सच में मेरा मन बदल गया आज पोस्ट लिखते-लिखते। मैंने सोचा था कि आज इंग्लैंड की सिमरन की कहानी आपको सुनाऊंगा। सुबह नींद खुलते ही मेरे मन में कहानी का ताना-बाना बुन जाता है। मैंने बहुत बार कोशिश की है कि कभी एक रात पहले ही लिख कर सो जाऊं, ताकि सुबह मुझे जल्दी न जगना पड़े, लेकिन मेरे चाहने से ऐसा नहीं होता। मेरी उंगलियाँ रुक जाती हैं, कहानी आगे बढ़ती ही नहीं।
सेक्स कमजोरी के लेवल का स्टेटस

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
डेंगू से मरने वालों पर रोज छप रहा है। पर एक डाक्टर या क्लिनिक नहीं देखा,जो डेंगू का शर्तिया इलाज करता हो। शर्तिया इलाज करने वाले सारे डाक्टर सेक्स कमजोरी के इलाज में लगे हैं। अभी सेक्स कमजोरी को दूर करने वाले एक डाक्टर का इश्तिहार देखा, जिसमें बताया गया कि उऩ्हे लंदन, दोहा, कतर, मारीशस से सम्मान मिला है।
फेसबुक का लाइकाचार

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
जी मैं पुराने स्कूल का हूँ, कई महिला मित्र फेसबुक पर प्रोफाइल पिक अपडेट करती हैं, पर मैं उन्हे लाइक नहीं करता, मतलब लाइक करने का मन हो तो भी लाइक के सिंबल को क्लिक ना करता। सुंदर, बहुत स्मार्ट लिखने का दिल करता है, पर, पर उन्ही महिला मित्रों को बाक्सर भाई भी मेरे मित्र हैं, जो बरसों यह उद्घोषणा करते आ रहे हैं कि उनकी बहन की ओर आँख उठाकर भी किसी ने देखा तो उसे खल्लास कर देंगे। किसी महिला मित्र की फोटो को लाइक करने की इच्छा की क्षणों में वह बाक्सर भाई यह कहता दिख जाता है-अच्छा बेट्टे, मेरी बहन की तरफ ना सिर्फ तूने आँख उठाकर देखा, बल्कि उसे लाइक तक किया, आज निकलियो घर से।
‘उम्मीद’ की ज्योति जलाएं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरी आज की पोस्ट पढ़ने से पहले आप उस तस्वीर को देखिएगा, जिसमें लड़की ने अपने मुँह पर नकाब बाँध रखा है।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
चंपावती के नाम पर पड़ा चंबा शहर का नाम
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :





