चंबा की विरासत से रूबरू कराता भूरी सिंह संग्रहालय

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
किसी भी शहर के इतिहास को जानने के लिए वहाँ के संग्रहालय को जरूर देखना चाहिए। चंबा का भूरी सिंह संग्रहालय आपको शहर और आसपास के समृद्ध ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराता है। यह एक छोटा सा संग्रहालय है पर इसे काफी बेहतर ढंग से प्रबंध करके रखा गया है।
जायका का स्वाद जो कभी नहीं भूलता…

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
दोपहर में हमलोग होटल रायल ड्रीम में चेक-इन कर चुके थे। अब चंबा शहर को देखने निकलना था। चंबा में चौगान पर हमारा इंतजार ममता शर्मा कर रही थीं। वही ममता जो हमें श्रीनगर में मिली थीं। दिल्ली के प्रगति मैदान में भी दो बार मिलीं। वे अपने गाँव जा रही हैं। उनका घर चंबा से 60 किलोमीटर आगे तीसा क्षेत्र में है। हमारे होटल से बस स्टैंड 5 किलोमीटर है। वहाँ तक जाने के लिए समय समय पर आने वाली बस ही विकल्प है। पर हमें भूख लग रही है।
बचपन

राकेश उपाध्याय, पत्रकार :
कौसल्या जब बोलन जाई। ठुमुक-ठुमुक प्रभु चलहिं पराई। निगम नेति सिव अंत न पावा। ताहि धरै जननी हठि धावा।।
बाल चरित अति सरल सुहाए, सारद सेष संभु श्रुति गाए।
जिन्ह कर मन इन्ह सन नहीं राता, ते जन बंचित किए बिधाता।।
अहंकार जब-जब जीता, आदमी तब-तब हारा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज के पात्र
बेटा- रमन।
माँ- तृप्ता रानी।
बहू- मोनिका।
***
साडे चिड़ियों दा चंबा वे…बाबुल अस उड़ जाना..

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हमारी बस धीरे-धीरे चंबा की ओर बढ़ रही थी। खजियार 1900 मीटर के करीब ऊँचाई पर है और चंबा 900 मीटर पर नीचे। इसलिए खजियार से चली बस धीरे-धीरे उतर रही थी।
प्यार, स्नेह और मान दें रिश्तों में प्रेम के अंकुर फूटेंगे

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैं एक बहू से मिला हूँ। मैं एक सास से मिला हूँ।
दोनों में नहीं बनती। क्यों नहीं बनती मुझे नहीं पता। बहू का कहना है कि सास हर पल उसे नीचा दिखाती हैं।
सास कहती हैं कि बहू उसे पूछती नहीं।
हर दिल जो प्यार करेगा, वो इश्क-क्लिक देखेगा

संदीप त्रिपाठी :
22 जुलाई को रिलीज होने जा रही फिल्म इश्क-क्लिक के निर्माता सतीश त्रिपाठी का कहना है कि जिस हृदय में प्रेम लेश मात्र भी होगा, उसे इश्क क्लिक जरूर अच्छी लगेगी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म एक मासूम मोहब्बत की कहानी है जहाँ कोई गलत नहीं है। इश्क-क्लिक के निर्माता अजय जायसवाल-सतीश त्रिपाठी की जोड़ी के सतीश त्रिपाठी आज देश मंथन के कार्यालय आये और इश्क-क्लिक के बाबत ढेरों बातें कीं।
लोक आस्था के प्रतीक हैं खजिनाग

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हिमाचल के धौलाधार पर्वत मालाओं के बीच कई नाग मंदिर हैं। इनमें खजियार का खजिनाग मंदिर प्रमुख है। खजिनाग मंदिर बारहवीं सदी का बना हुआ है। आठ सौ साल पुराना ये मंदिर अपने ऐतिहासिकता और पुरातात्विक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार चंबा के राजा पृथ्वी सिंह की दाई बाटुल ने करवाया था। मंदिर के गर्भ गृह में खज्जी नाग की प्रस्तर प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के प्रांगण में पंच पाँडवों की काष्ठ प्रतिमाएँ स्थापित की गयी हैं।
जिन्दगी में कुछ ऐसा करें जिससे संतोष मिले

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैंने तो पहले ही बता दिया था कि दो दिन पहले जब मथुरा से Pavan Chaturvedi भैया मेरे घर आए थे, तो उन्होंने मुझे कई कहानियाँ सुनाई थीं। एक नहीं, दो नहीं, तीन या चार भी नहीं, ढेरों कहानियाँ। मैंने उसी में से एक चिड़िया की कहानी आपको परसों सुनाई थी।
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा….

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
एक सपनीली दुनिया है खजियार मैदान में। खजियार ग्राउंड को देख कर कई फिल्मों के दृश्य अचानक ही जेहन में याद आने लगते हैं। अपने अनूठे सौंदर्य के कारण खजियार का सौंदर्य बालीवुड के निर्माताओं को हमेशा अपनी ओर खींचता है। 1942 लव स्टोरी फिल्म का गीत…एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा...जैसे खिलता गुलाब...के कुछ दृश्यों खजियार के नजारे दिखाई देते हैं। इ
लक्ष्मी रुकेंगी, चरित्र के सभी अवगुणों को दूर करके

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज की पोस्ट खास तौर पर आपके लिए ही है। पर आज पोस्ट को पढ़ने के बाद आप अपने बच्चों से इसे साझा कीजिएगा। उन्हें अपने पास बिठा कर इस कहानी को जरूर सुनाइएगा, जिसे कल मेरे बड़े भाई Pavan Chaturvedi ने मुझसे साझा किया।
समस्या

प्रेमचंद :
मेरे दफ्तर में चार चपरासी हैं। उनमें एक का नाम गरीब है। वह बहुत ही सीधा, बड़ा आज्ञाकारी, अपने काम में चौकस रहने वाला, घुड़कियाँ खाकर चुप रह जानेवाला यथा नाम तथा गुण वाला मनुष्य है। मुझे इस दफ्तर में साल-भर होते हैं, मगर मैंने उसे एक दिन के लिए भी गैरहाजिर नहीं पाया।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
राकेश उपाध्याय, पत्रकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
संदीप त्रिपाठी :
प्रेमचंद : 





