रोम-रोम में बसी है माँ

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
स्कूल में जब सारे बच्चे बात-बात पर विद्या कसम खा लेते थे, तब भी मैं विद्या कसम नहीं खाता था।
लेटे हुए हनुमान जी यानी भद्र मारूति

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
देश में बजरंग बली के लाखों मंदिर होंगे, पर इनमें खुल्ताबाद का भद्र मारुति मंदिर काफी अलग है। एलोरा गुफाओं के बाद हमारा अगला पड़ाव था भद्र मारूति। खुल्ताबाद गाँव में स्थित इस मंदिर में लेटे हुए हनुमान जी की विशाल प्रतिमा है। इस तरह के लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा देश में सिर्फ इलाहाबाद में हैं। एलोरा से भद्रा मारूति की दूरी तीन किलोमीटर है।
ईश्वर के यहाँ कुछ नहीं छिपता

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज मैं जो कुछ लिखने जा रहा हूँ, उस पर मुझे पहले से पूरा यकीन था, लेकिन मैं तब तक इस पर कुछ कह नहीं सकता था, जब तक कि इसका कोई वैज्ञानिक आधार मेरे पास उपलब्ध नहीं होता। आज मेरे पास वैज्ञानिक आधार उपलब्ध है।
जायका रतलाम के सेव का

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हमारी ट्रेन जब भी रतलाम से होकर गुजरती है मैं रतलामी सेव का एक पैकेट जरूर खरीदता हूँ। वैसे तो सेव इंदौर और उज्जैन के भी प्रसिद्ध हैं पर रतलामी सेव की बात अलग है। रतलाम मध्य प्रदेश का शहर है। यह रेलवे का बड़ा जंक्शन है।
राष्ट्रीय रेल भिंडी बाजार से होकर गुजरना….

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
भक्ति पार्क मोनो रेल स्टेशन से सीएसटी की तरफ जाना था। अचानक बेस्ट की बस नंबर 45 दिखायी देती है। इस पर मंत्रालय लिखा था। हमने पूछा सीएसटी होकर जाती है। उत्तर हाँ में मिलने पर हम बस में सवार हो गये। बस में सीट मिल गयी। पर आने वाले स्टाप पर भीड़ बढ़ने लगी।
सबसे खतरनाक, सपनों को मराना

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
सुबह नींद खुल गयी थी और कम्यूटर को ऑन करने जा ही रहा था कि दरवाजे पर घंटी बजी।
राष्ट्री आल्हा उदल की आराध्या – मैहर की माँ शारदा देवी

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है मैहर का माँ शारदा देवी का मंदिर। सतना जिले के मैहर कस्बे में मैहर शहर है माँ शारदा का मंदिर। यहाँ श्रद्धालुगण माता का दर्शन कर आशीर्वाद लेने उसी तरह पहुँचते हैं जैसे जम्मू में माँ वैष्णो देवी का दर्शन करने जाते हैं। माँ शारदा लोकगाथाओं के महान वीर आल्हा और उदल की देवी हैं।
चंद्रवती मत बनें

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
पटना में था तो घर में काम करने वाली महिला को हम 'दाई' बुलाते थे। भोपाल गया तो वहाँ घर पर काम करने वाली को 'बाई' बुलाने लगे। वैसे तो दिल्ली मुझ जैसे जहीन इंसान के लिए रत्ती भर मुफीद जगह नहीं है, जहाँ बात-बात पर माँ-बहन को घसीट लिया जाता है, पर यहाँ घर में काम करने वाली महिला को 'माई' बुलाने का रिवाज है और यह रिवाज मुझे बहुत अच्छा लगता है।
राष्ट्रीय रेल कन्हेरी – 109 गुफाओं में बुद्ध

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
अगर आप अजंता एलोरा की गुफाओं का भ्रमण कर चुके हैं तो आपको मुंबई के बोरिवली इलाके में स्थित कन्हेरी की गुफाएँ जरूर देखनी चाहिए। अगर अजंता एलोरा नहीं गये तो भी कन्हेरी जरूर जाएं। यह काफी कुछ अजंता एलोरा जैसा ही है।
चंद्रवती

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरी पत्नी की छोटी बहन का नाम है आभा। ईश्वर की ओर से मुझे बतौर साली वो मिली है। है तो पूरी अंग्रेजी वाली और मुझे नहीं लगता कि उसने अपनी जिन्दगी में हिंदी की कोई किताब पूरी पढ़ी होगी। प्रेमचंद का नाम सुना है, पर मेरा दावा है कि उनकी एक भी कहानी उसने किताब में आँखें गड़ा कर नहीं पढ़ी होगी। दो चार कहानियाँ मेरे मुँह से सुन कर ही हिंदी साहित्य का उसका भरा-पूरा ज्ञान हम सबके सामने है।
मन क्या है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आपके पास एक ऐसी चीज है जो हमेशा साथ है लेकिन आप उसे जान कर भी पहचानते नहीं । आप दिन में सौ बार उसकी चर्चा करते हैं, सौ बार उससे बातें करते हैं, सौ बार उसकी सुनते हैं, सौ बार उसकी अनदेखी कर देते हैं पर उसी की तलाश में आप पूरी जिन्दगी भटकते रह जाते हैं।
मन क्या है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आपके पास एक ऐसी चीज है जो हमेशा साथ है लेकिन आप उसे जान कर भी पहचानते नहीं । आप दिन में सौ बार उसकी चर्चा करते हैं, सौ बार उससे बातें करते हैं, सौ बार उसकी सुनते हैं, सौ बार उसकी अनदेखी कर देते हैं पर उसी की तलाश में आप पूरी जिन्दगी भटकते रह जाते हैं।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :





