चलिए मोनो रेल से देखें मुंबई

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मोनो रेल यानी एक पहिए पर चलने वाली रेल। देश में मुंबई शहर में चलने लगी है मोनो रेल। इस बार मुंबई की यात्रा में हमारी दिली तमन्ना थी कि मोनो रेल का सफर किया जाये। सो 20 फरवरी की सुबह-सुबह मैं और अनादि तैयार हो गये मोनो रेल के सफर पर जाने के लिए।
एक गमछात्मक पोस्ट

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
Anil Upadhyay जी के सौजन्य से बरसों बाद अपन गमछित हुए।
गर्मियों में गमछा बहुतै काम आता है। मेरे कई शौकों में से एक शौक यह है कि दिल्ली में मुँह उठा कर किसी भी दिशा में निकल जाना, इंडिया गेट से लेकर रोहिणी से लेकर द्वारिका तक के किसी पब्लिक पार्क में सोते हुए, आधे जागते हुए जमाने के हाल पर गौर फरमाना।
शापिंग मुंबई के फैशन स्ट्रीट से

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मुंबई में मध्यम वर्ग के लोगों के लिए खरीदारी करने का प्रिय स्थल है फैशन स्ट्रीट। पहले ये जान लेते हैं कि फैशन स्ट्रीट है कहाँ। तो जनाब ये वेस्टर्न लाइन के आखिरी स्टेशन चर्च गेट या फिर सेंट्रल लाइन के आखिरी टर्मिनल छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से बीच में है।
कोट मुक्ति मुद्रा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
यह भी तारीखों का ही एक खेल है कि बहुत साल पहले मैं अपने छोटे भाई के साथ 19 अप्रैल की सुबह बैठा हुआ था और अगले दिन होने वाली अपनी शादी की चर्चा कर रहा था। मेरी शादी में मेरा छोटा भाई ही माँ बना बैठा था, पिता बना बैठा था, सखा बना बैठा था।
दादर यानी मुंबई का दिल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
वैसे तो मुंबई बहुत बड़ी है। पर मुंबई का दिल तो दादर में बसता है। भला कैसे। अगर आप नक्शे में देखेंगे तो दादर मुंबई के लगभग बीच में है। मैंने अपने मुंबई के पुराने दोस्त आईपीएस यादव से पूछा की मुंबई में घूमने के लिए कुछ दिन रुकना हो तो कहाँ रुकना ठीक होगा। उन्होंने कहा, दादर में रुकिए। वहाँ से सारे स्थानों को जाने के लिए गाड़ियाँ मिल जाती है। वैसे दादर कहीं से भी बीच में है। यह काफी हद तक सही भी है।
स्पष्ट खुलासा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैं चाहूँ तो फोन करके भी जबलपुर के Rajeev Chaturvedi को धन्यवाद कह सकता हूँ। लेकिन मैं पोस्ट के जरिए धन्यवाद कहने जा रहा हूँ, क्योंकि उन्होंने इस बार मुझे एक ऐसी किताब भेंट की जिसने मेरी समझ के आकार को बदल दिया है। मैंने उनसे कई बार इस बात की चर्चा की थी कि अपने छोटे भाई के निधन से मैं बहुत व्यथित हूँ, और भीतर ही भीतर बहुत अवसाद से गुजरता हूँ।
मुंबई की टैक्सी सेवा के बहाने प्रीमियर पद्मिनी की याद

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मुंबई के कई अच्छे चेहरे हैं। इसमें एक है यहाँ की टैक्सी और आटो सेवा। मुंबई में कोई टैक्सी वाला आपको दिन हो या रात कभी भी कहीं जाने से मना नहीं करेगा। हमेशा मीटर से चलने की बात करेंगे। कोई किराया की बारगेनिंग नहीं। मुख्य मुंबई के इलाके में तो आटो रिक्शा चलते ही नहीं हैं। सिर्फ टैक्सी सेवाएँ हैं।
गोनू झा की बिल्ली

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
राजा ने सभी दरबारियों को एक-एक बिल्ली और एक-एक गाय दी। सबसे कहा कि महीने भर बाद जिसकी बिल्ली सबसे ज्यादा तगड़ी दिखेगी, उसे इनाम मिलेगा।
मन को साफ करो खुश रहोगे

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैं प्रेम पर लिखते हुए बहुत डरता हूँ। डर की वजह सिर्फ इतनी है कि जब मैं ऐसी पोस्ट लिखता हूँ तो अगले दिन मेरे पास ऐसे-ऐसे कई सवाल आ खड़े होते हैं, जिनके जवाब में मुझे फिर प्रेम पर एक पोस्ट लिखनी पड़ती है। एक पोस्ट और लिख कर मैं मुक्त होता हूँ और सोचता हूँ कि कल ये वाली कहानी लिखूँगा, वो वाली कहानी लिखूँगा, पर रात में जैसे ही अपने इनबॉक्स में झाँकता हूँ, मेरी तय की हुई सारी कहानियाँ उड़ जाती हैं और रह जाता है प्रेम।
रूमानी है एलिफैंटा के लिए स्टीमर का सफर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया से एलीफैंटा टापू तक जाने में तकरीबन सवा घंटे लगते हैं। पर ये सफर यादगार होता है। दूरी की बात करें तो यह रास्ता 12 किलोमीटर का है। मुंबई से एलीफैंटा के बीच कुल 90 मोटर बोटों को संचालन होता है। ये मोटर बोट एक सहकारी समिति के तहत चलती हैं।
चाहत में शिद्दत हो सब मिलेगा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
संजय जी, मेरी जिन्दगी में प्रेम नहीं है।”
कल मेरा इनबॉक्स इस एक वाक्य से भर गया। कुछ लोगों ने तो सीधे-सीधे मेरी वाल पर ही अपनी कहानी लिख दी, कुछ लोगों ने अपने दोस्तों की कहानी लिखी कि उसके दोस्त को फलाँ से प्यार है, पर उसकी शादी हो चुकी है, उसके बच्चे हैं, अब वो क्या करे?
स्पंज डोसा का स्वाद अलबेला

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मसाला डोसा तो आपने कई तरह के खाए होंगे, पर स्पंज डोसा का स्वाद लिया क्या। तो आइए लेते हैं स्पंज डोसा का स्वाद... कहाँ। पुणे में।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :





