सफेद बाघ से मुलाकात

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
अरिगनार अन्ना जूलोजिकल पार्क जिसे चेन्नई में लोग वेंडालूर जू के नाम से भी जानते हैं। देश के सबसे पुराने और शानदार चिड़ियाघरों में शुमार है। चेन्नई में इस जू का भ्रमण करने के लिए हमने एक दिन नीयत रखा था। सो हम लोग तांब्रम रेलवे स्टेशन के बस स्टाप से लोकल बस में बैठने के थोड़ी देर बाद ही जू के प्रवेश द्वार पर थे। बड़ों का टिकट 30 रुपये बच्चों का 10 रुपये कैमरे का 30 रुपये अलग से। मोबाइल कैमरा, आईपैड, टैब आदि के लिए भी टिकट लेना जरूरी है। हैंडीकैम से सूट करना चाहते हैं तो 150 रुपये। जू सुबह 9 से 5 बजे तक खुला रहता है। मंगलवार को बंद। हर रोज दर्शकों की अच्छी खासी भीड़ होती है।
विचित्र होली

प्रेमचंद :
होली का दिन था; मिस्टर ए.बी. क्रास शिकार खेलने गये हुए थे। साईस, अर्दली, मेहतर, भिश्ती, ग्वाला, धोबी सब होली मना रहे थे। सबों ने साहब के जाते ही खूब गहरी भंग चढ़ायी थी और इस समय बगीचे में बैठे हुए होली, फाग गा रहे थे। पर रह-रहकर बँगले के फाटक की तरफ झाँक लेते थे कि साहब आ तो नहीं रहे हैं। इतने में शेख नूरअली आकर सामने खड़े हो गये।
तमिलनाडु की ओर – वणक्कम चेन्नई

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
अगर आपको देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से की लंबी यात्रा करनी हो तो रेल से बेहतर कुछ नहीं। एक के बाद दूसरे राज्य में प्रवेश करती रेल बदलता खानपान और बोली। यह रेल में ही दिखायी दे सकता है। पर दिल्ली से चेन्नई और हैदराबाद का सफर मैं कई बार रेल से कर चुका था। सो इस बार तीस घंटे रेल में गुजारने के बजाए तीन घंटे फ्लाइट में गुजारने का तय किया। इससे हमारे दो दिन की बचत भी होने वाली थी।
सौभाग्य के कोड़े

प्रेमचंद :
लड़के क्या अमीर के हों, क्या गरीब के, विनोदशील हुआ ही करते हैं। उनकी चंचलता बहुधा उनकी दशा और स्थिति की परवा नहीं करती। नथुवा के माँ-बाप दोनों मर चुके थे, अनाथों की भाँति वह राय भोलानाथ के द्वार पर पड़ा रहता था। रायसाहब दयाशील पुरुष थे। कभी-कभी एक-आधा पैसा दे देते, खाने को भी घर में इतना जूठा बचता था कि ऐसे-ऐसे कई अनाथ अफर सकते थे, पहनने को भी उनके लड़कों के उतारे मिल जाते थे, इसलिए नथुवा अनाथ होने पर भी दुखी नहीं था। रायसाहब ने उसे एक ईसाई के पंजे से छुड़ाया था। इन्हें इसकी परवा न हुई कि मिशन में उसकी शिक्षा होगी, आराम से रहेगा; उन्हें यह मंजूर था कि वह हिंदू रहे। अपने घर के जूठे भोजन को वह मिशन के भोजन से कहीं पवित्र समझते थे। उनके कमरों की सफाई मिशन की पाठशाला की पढ़ाई से कहीं बढ़कर थी। हिंदू रहे, चाहे जिस दशा में रहे। ईसाई हुआ तो फिर सदा के लिए हाथ से निकल गया।
पुडुचेरी बॉटानिकल गार्डन और चर्च

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
पुडुचेरी के दर्शनीय स्थलों में से एक है बॉटानिकल गार्डन। यह गार्डन नए बस स्टैंड और पुराने बस स्टैंड के बीच लाल बहादुर शास्त्री स्ट्रीट पर स्थित है। इसे पुराना बुसी रोड भी कहते हैं। कई लोग इस सड़क को बीच रोड भी कहते हैं।
रिश्तों के साथ जीना

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
दीदी की शादी थी। एक रात पहले घर के सामने सड़क पर टेंट लगाया जा रहा था। कुर्सियाँ बिछायी जा रही थीं। हल्की-हल्की सर्दी थी। पिताजी, चाचा, मामा, मौसा, फूफा, ताऊ जी सब वहीं डटे थे। किसी को कोई जिम्मेदारी नहीं दी गयी थी, सब के सब अपनी जिम्मेदारी समझ रहे थे।
ताज मेरा है

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
सुप्री- कोर्ट ने यूपी सरकार को हड़काया है कि बरसों पहले ताजमहल बनाया जा सकता है तो आज सड़कें क्यों नहीं बनायी जा सकतीं।
पुडुचेरी शहर और संडे मार्केट

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
नाम से पुडुचेरी ऐसा लगता है मानो यह दमन दीव जैसा कोई समुद्र तटीय राज्य होगा। है भी वैसा ही। पर पुडुचेरी शहर के मुख्य बाजार का चाक चिक्य किसी दिल्ली के करोल बाग मुंबई के हीरा पन्ना मार्केट से कम नहीं है। शहर का दिल जवाहर लाल नेहरू स्ट्रीट पर धड़कता है।
गुरु-मंत्र
प्रेमचंद :
घर के कलह और निमंत्रणों के अभाव से पंडित चिंतामणिजी के चित्त में वैराग्य उत्पन्न हुआ और उन्होंने संन्यास ले लिया तो उनके परम मित्र पंडित मोटेराम शास्त्रीजी ने उपदेश दिया- मित्र, हमारा अच्छे-अच्छे साधु-महात्माओं से सत्संग रहा है।
योग साधना का केंद्र – श्री अरविंदो आश्रम पुडुचेरी

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
पुडुचेरी की पहचान अरविंदो आश्रम से भी है। यह आध्यात्मिक चेतना का बड़ा केंद्र है। श्री अरविंदो आश्रम 24 नवंबर 1926 को अरविंदो द्वारा स्थापित किया गया था। इस दिन को सिद्धि दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
अलग लोगों की होती हैं कहानियाँ

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
“माँ, आज कौन सी कहानी सुनाओगी?”
अदभुत, अनूठा – ऑरोविल इंटनेशनल सिटी

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
ऑरोविल इंटरनेशनल सिटी को आमतौर पर लोग पुडुचेरी में कहते हैं पर यह पुडुचेरी के पास तमिलनाडु राज्य के विलुप्पुरम जिले में स्थित है। यह एक प्रायोगिक नगर है। इसकी स्थापना 1968 में मीरा रिचर्ड ने की थी। इसकी रूपरेखा वास्तुकार रोजर ऐंगर ने तैयार की थी।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
प्रेमचंद :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :





