जब 20 मिनट में “मिस टनकपुर” देखने के बाद उठ गये अनुराग कश्यप!

विनोद कापड़ी, फिल्म निर्देशक :
फिल्म मेकिंग की आपने कई कहानियाँ सुनी। कभी आपने एक फिल्म के रिलीज होने की कहानी नहीं सुनी होगी।
ईदगाह

प्रेमचंद :
रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है, यानी संसार को ईद की बधाई दे रहा है।
सारा दिन दूसरे के इशारे पर गुलाटियाँ मारता है आदमी

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मेरे फिजिक्स के टीचर डॉर्विन का सापेक्षता का सिद्धान्त पढ़ा रहे थे।
गरम हवाओं ने पूरब की शीतलता में उष्णता भर दी

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
“गरम हवाओं ने पूरब की शीतलता में कब और कैसे उष्णता भर दी, हम देखते रह गये…”
मैंने कल यहाँ फेसबुक पर अपनी पोस्ट में लिखा था कि कैसे मैं रेडियो मिर्ची के एक शो में गया, तो रेडियो जॉकी शशि ने मुझे बताया कि एक बुजुर्ग दंपति, जिनके तीनों बच्चे अमेरिका में सेटल हो गये हैं, पटना में अकेले जिन्दगी गुजार रहे हैं।
एक साथ ब्रह्मचर्य और सन्नी लियोन लवर्स ग्रुप

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
मैं फेसबुक पर उस दिन हैरान रह गया जब मैंने खुद को फेसबुक पर एक साथ ब्रह्मचर्य उत्थान समूह का और गरम कहानियाँ समूह का हिस्सा पाया।
अलग्योझा : मानसरोवर खंड 1

प्रेमचंद :
भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी।
यही है जिन्दगी, यही है रिश्ता

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
करीब 30 साल पहले मैं अपनी जन्मभूमि से दूर जा रहा था तब मेरी खुली आँखों में हजारों यादें सिमटी थीं।
लोकदेवता – पशुपालकों के पूज्य भुइंया बाबा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
उत्तर बिहार के वैशाली जिला ही नहीं बल्कि इसके आसपास के जिले के लोगों के बीच भुइंया बाबा काफी लोकप्रिय हैं। आस्था ऐसी है कि भुइंया बाबा इस क्षेत्र में लोक देवता की बन चुके हैं।
हे गोबिंद राखो शरण अब तो जीवन हारे

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हरि (विष्णु) और हर (महादेव) का क्षेत्र है हरिहर क्षेत्र। यानी शैव और वैष्णव परंपरा का संगम। बिहार को सारण जिले में स्थित सोनपुर में हरिहरनाथ का अति प्राचीन मन्दिर है।
संयोगों का एक विघटन है जिन्दगी

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
कभी रुक कर सोचिएगा कि जिन्दगी क्या है। जिन्दगी चन्द यादों के सिवा कुछ नहीं। यादें बचपन की, यादें जवानी की, यादें दादी-नानी की कहानियों की और यादें माँ की लोरियों की। यादें अपने जन्म की।
गुणों का कंगाल होता है विलेन

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
हीरो की माँ, बहन और पत्नी या प्रेमिका तीनों खंभे से बंधी हुयी हैं। हीरो कई-कई पहलवानों से घिरा है।
सूरज एलटीसी पर

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार
मिसेज गुप्ता इस बार मलेशिया हो कर आयी हैं और तुम मिस्टर श्रीवास्तव का क्या मुकाबला करोगे, वो तो यूरोप जा रहे हैं।



विनोद कापड़ी, फिल्म निर्देशक :
प्रेमचंद :
संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :





