जहाँ आकर मौत भी मुस्काराती है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज मैं आपको जबलपुर में बैठ कर अनिता की कहानी सुनाऊँगा। फिर सुनाऊँगा फेसबुक पर किसी की भेजी वो कहानी जिसका रिश्ता सीधे-सीधे अनिता की कहानी से जुड़ा है।
जिन्दगी की उम्मीद

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज मुझे मिलना है जबलपुर के विराट हॉस्पिस में कैंसर के उन मरीजों से जिन्हें डॉक्टरों ने कह दिया है कि अब दवा नहीं सिर्फ दुआ का आसरा है।
अचानक ट्रेन हुई रद्द : कैसे पहुँचे दिल्ली

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आप मुंबई जैसे शहर में हों, और अचानक आपको आपकी ट्रेन रद्द होने की जानकारी मिले तो क्या गुजरेगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। मुंबई से परिवार समेत वापसी का टिकट एक महीने पहले करवाया था। अमृतसर एक्सप्रेस जैसी ट्रेन जिसे डुप्लिकेट पंजाब कहा जाता है एसी 3 में वेटिंग मिला था जो खिसकते हुए आरएसी में आ गया था। पर वह 20 फरवरी की शाम थी, दिन भर बोरिवली नेशनल पार्क में घूमने के बाद शाम को हमलोग मुंबई के फैशन स्ट्रीट पर घूम रहे थे। थोड़ी शापिंग कर डाली थी, कुछ और करने के लिए मोलभाव में लगे थे। तभी मोबाइल पर एक आईआरसीटीसी का मैसेज आता है। पहले मुझे लगा कि आरएसी के कनफर्म होने का संदेश होगा। मैंने बेतकल्लुफी से लिया। पर सोचा एक बार संदेश पढ़ लेता हूँ।
रिश्तों की तलाश

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज आपको बहुत से सवालों के जवाब मिल जाएँगे।
पुणे स्टेशन के बाहर खड़ा 724 एफ स्टीम लोकोमोटिव : शकुंतला

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
राष्ट्रीय रेल संग्रहालय चाणक्यापुरी दिल्ली के अलावा देश में कई जगह आपको रेलवे का इतिहास बताने वाले पुराने लोकोमोटिव खड़े दिखायी दे जाएँगे। पुणे रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक से बाहर निकलते ही बाईं तरफ नजर डालने पर एक नन्हा लोकोमोटिव आराम फरमाता नजर आता है।
कविगुरु एक्सप्रेस से महामना एक्सप्रेस तक

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के नाम पर 22 जनवरी 2016 से वाराणसी और दिल्ली के बीच नई ट्रेन महामना एक्सप्रेस चलायी गयी है। संयोग है कि इस ट्रेन का संचालन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के 100 साल पूरे होने के मौके पर किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की स्थापना 4 फरवरी 1916 को हुई थी।
जीने का संकल्प

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
“जब विकल्प की सीमाएँ समाप्त हो जाती हैं, तब मानव संकल्प का उदय होता है।”
न्यू जलापाईगुड़ी में खड़ा मीटरगेज का स्टीम लोकोमोटिव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
लोगों को रेलवे के इतिहास से रूबरू कराने के लिए कई रेलवे स्टेशनों के बाहर पुराने लोकोमोटिव को सजा संवार कर प्रदर्शित किया गया है। न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन के बाहर निकलने पर दाहिनी तरफ एक विशाल लोकोमोटिव आराम फरमाता हुआ दिखाई देता है। यह एक मीटर गेज नेटवर्क पर चलने वाला इंजन है। इंजन का नाम एमएडब्यूडी 1798 ( MAWD 1798) है। साल 1944 में निर्मित ये लोकोमोटिव अमेरिकी युद्ध के दौरान डिस्पोज किया गया स्टीम लोकोमोटिव है। इसका निर्माण ब्लाडविन लोकोमोटिव वर्क्स में किया गया था।
मस्ती भरा सफर- प्रतापनगर जंबुसार नैरो गेज

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गुजरात में दभोई-मियागाम के अलावा गुजरात में प्रतापनगर (वडोदरा) और जांबुसार जंक्शन और कोसांबा उमरपाडा, बिलिमोरा वाघाई के बीच अभी भी नैरो गेज रेल नेटवर्क संचालित हो रहा है। प्रतापनगर से जंबुसार नैरो गेज रेलवे लाइन की कुल लंबाई 51 किलोमीटर है। पहले ये लाइन सामनी तक जाती थी, जिसकी कुल दूरी 75 किलोमीटर थी। पर अब यह प्रतापनगर तक ही सीमित हो गई है। प्रतापनगर और जांबुसार के बीच 13 रेलवे स्टेशन हैं।
जन्मों को होता है पति-पत्नी का रिश्ता

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
पांडव लाक्षागृह में बतौर मेहमान बुलाए गये थे और जब उसमें आग लग गयी तो वो फँस गये थे। कहीं से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। अब कोई करे भी तो क्या करे। लाक्षागृह धू-धू कर जल रहा था। युधिष्ठिर विचलित थे। अब इसमें से कोई कैसे बाहर निकले। सबकी आँखों में यही सवाल था।
कब बजेगी शिलांग में रेल की सिटी

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
वह साल 2014 में 29 नवंबर का दिन था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेघालय के लिए पहली ट्रेन को झंडी दिखा कर रवाना किया। इसके साथ ही आजादी के छह दशक से अधिक समय बाद मेघालय देश के रेल नक्शे पर आ गया।
सलाम सचिन

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
शायद पच्चीस साल पुरानी बात है, हमारे अखबार के संपादक प्रभाष जोशी क्रिकेट का मैच देखने न्यूजीलैंड गये हुए थे। वहाँ से मैच का आँखों देखा हाल वो रोज जनसत्ता में छाप रहे थे। तब मैं जनसत्ता में उप संपादक के पद पर काम करने लगा था।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :





