‘सोच’ बनी ‘समस्या’

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरे आज के लिखे को पढ़ कर प्लीज नाक भौं मत सिकोड़ियेगा। इन दिनों इस विषय को सरकार जोर-शोर से उठा रही है। ये आदमी की नैसर्गिक जरूरत है।
धैर्य, लगन और ईमानदार मेहनत से मिलता है पुरस्कार

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज मुझे एक गुदगुदाने वाले रिश्ते के बारे में लिखना था, लेकिन सुबह जैसे ही नींद खुली याद आया कि आज कंगना रनाउत से मिलना है।
नंदन कानन : ओडिशा का अनूठा जैविक उद्यान

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के बाहरी इलाके में स्थित नंदन कानन उद्यान देश के सुंदरतम चिड़ियाघरों में से एक है। इसके साथ खास बात यह है कि प्राकृतिक वन क्षेत्र में यह जैविक उद्यान बनाया गया है।
हौसले और अभ्यास से मिलती है उड़ान

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
पिताजी के साथ बड़ौदा में आखिरी फिल्म मैंने ‘रंगीला’ देखी थी।
पता नहीं क्यों पिताजी को फिल्म बहुत पसंद आयी थी। जब हम फिल्म देख कर लौट रहे थे, तो पिताजी ने कहा कि इस फिल्म में उर्मिला मातोंडकर ने बहुत अच्छी एक्टिंग की है।
…और बड़ौदा तक पहुँची नैरो गेज रेल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
एक जुलाई 1880 को नैरो गेज लाइन दभोई से चलकर गोया गेट ( बड़ौदा) तक पहुँची। हालाँकि इस लाइन के लिए सर्वे काफी पहले 1860 में ही कर लिया गया था।
बेटियों के गुनाहगार

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
राज कपूर की फिल्म ‘प्रेम रोग’ जब मैं देख रहा था, तब मैं स्कूल में रहा होऊंगा।
प्रतापनगर : यहाँ देखिये नैरो गेज का इतिहास

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
प्रताप नगर रेलवे स्टेशन की दूरी बड़ौदा रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर है। हालाँकि दोनों स्टेशन रेलवे लाइन से भी संपर्क में हैं। पर अगर आपको प्रताप नगर कभी भी पहुँचना हो तो वड़ोदरा रेलवे स्टेशन से ऑटो रिक्शा से जाना पड़ता है।
एक मार्ग-टटोलक के नोट्स

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
यहाँ मुझे, सुभाष चंदरजी और हरीश नवलजी को मार्गदर्शक - मंडल बना दिया है। चलो सुभाष चंदरजी और हरीश नवलजी तो पर्याप्त बुजुर्ग हो चुके हैं कि इन्हे मार्गदर्शक - मंडल बना दिया जाये।
कब होगी आमची दिल्ली

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
दिल्ली में तो सुबह-सुबह नींद खुल ही जाती है, लेकिन मुंबई आकर मैं चाहता हूँ कि कुछ देर और होटल के बिस्तर में दुबका रहूँ। फिर तो जब सुबह होगी तो हो ही जायेगी।
मुंबई-सूरत की लाइफ लाइन है डबल डेकर ट्रेन

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
नाम है फ्लाइंग रानी एक्सप्रेस। गुजरात के व्यासायिक शहर सूरत को देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई से जोड़ती है। इसलिये ट्रेन में भीड़ भी खूब होती है।
‘गजेन्द्र मोक्ष’

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
माँ कहती थी कि मेरे पाँव में चक्कर बना हुआ है, इसलिये मैं घूमता रहूँगा।
तो क्या बड़ा होकर मैं गोल-गोल घूमूंगा? लेकिन गोल-गोल क्यों घूमूंगा, उससे तो मुझे चक्कर आने लगता है। फिर पाँव में चक्कर का मतलब क्या हुआ?
कल मैंने वाघा बार्डर की चर्चा की थी और आज मैंने सोचा था कि उस खूबसूरत लड़की की आँखों की कहानी बयाँ करूंगा, जो मुझे भारत-पाक की कंटीली सीमा के उस पार मिली थी, जिससे मैं कोई बात नहीं कर पाया था सिवाय उसकी तसवीर खींचने के और वो भी मुझसे एक शब्द नहीं बोल पायी थी, सिवाय मेरी तस्वीर लेने के।
किस्सा-ए-कोलस्ट्रोल

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
देखोजी कैसी-कैसी फ्राडबाजी है दुनिया में। कैसा भला सा नाम है कोलस्ट्रोल, जैसे लुईस कैरोल, जैसे पामेला एंडरसन, जैसे शिंडी क्राफर्ड, पर कोलस्ट्रोल की हरकतें देख लो।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :





