षडयंत्र और छल में बहुत ताकत होती है

संजय सिन्हा :
मुझे लगता है कि अगर राणा सांगा को उन्हीं के एक मंत्री ने छल से जहर नहीं दे दिया होता तो बाबर कभी दिल्ली पर शासन नहीं कर पाता।
बॉलीवुड के पोर्न-कारोबारियों को रेपिस्टों जैसी सजा मिले

अभिरंजन कुमार :
इंटरनेट, टीवी और फिल्मों के जरिए बेलगाम फैलाई जा रही अश्लीलता हमारे लिए बड़ी चिंता का मसला है, लेकिन AIB विवाद ने हमारी चेतना को झकझोर कर रख दिया है, इसलिये इसे लेकर मैं तल्खतम टिप्पणी करना चाहता हूं।
गुमनाम लिफाफे का अनजाना संदेश

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
एक अनपढ़ आदमी के नाम कहीं से एक चिट्ठी आयी। अनपढ़ आदमी अकेला था। न आगे नाथ न पीछे पगहा। ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी ने उस अनपढ़ आदमी के नाम घर पर चिट्ठी भेजी हो।
‘आम आदमी’ को आखिरी सलाम

रत्नाकर त्रिपाठी :
जब से लिपियों का ठीक से ज्ञान हुआ, तब से अखबार की दुनिया में झाँकने लगा था। घर से लिए बाहर तक हिंदी बोली जाती थी, सो हिंदी अखबार ठीक-ठाक बांच लेता था। बनारस में "पक्की गुजराती घुसपैठ" तो इस साल मई में हुई, लेकिन मेरे घर में ये पांच दशक पहले हो गयी थी।
ओबामा के सहारे कैसे बची इज्जत
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
इस मुल्क के हर बड़े आदमी का स्टेटस इन दिनों इस बात पर टिका है कि उसे ओबामा के सम्मान में आयोजित होने वाले लंच-डिनर का निमंत्रण मिला कि नहीं। एक बड़े स्टार के बेटे की शादी हाल में हुई थी। मेरे पड़ोसी को इस शादी का निमंत्रण मिला था। वे मुझसे नक्शेबाजी कर रहे थे कि देखिये आप को तो ना बुलाया गया उस शादी में। मुझे बुलाया गया। मेरा स्टैंडर्ड आपसे ऊँचा है।
जिंदगी सुन जरा मेरा इरादा क्या है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
संजय से उसकी क्लास टीचर ने पूछा, "संजू अगर मैं तुम्हें दो रुपये दूँ, और फिर दो रुपये दूँ तो तुम्हारी जेब में कितने रुपये होंगे?"
संजू ने कहा कि मैडम जी, पाँच रुपये।
कब तक जेल से फर्लो पर फुर्र होंगे संजय दत्त

शिव ओम गुप्ता :
इतिहास में ऐसे प्रसंग बहुत कम ही देखने को मिलते हैं जब किसी सजायाफ्ता कैदी पर जेल प्रशासन इस कदर मेहरबान हुआ हो, जैसा महाराष्ट्र के यरवदा का जेल प्रशासन अभिनेता संजय दत्त पर मेहरबान है।
न्यायाधीशों के खिलाफ भी अब कर सकेंगे शिकायत!

देश मंथन डेस्क :
प्रायः हम सभी न्याय पाने की जुगत में न्यायालय की शरण में खड़े होते हैं और कई दफा हम न्याय के मंदिर में बैठे न्यायमूर्ति की न्याय से असंतुष्ट भी होते हैं, लेकिन न्यायमूर्ति के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हमारे पास अधिकार सीमित हैं, लेकिन अब आगे ऐसा नहीं होगा।
हमारी-आपकी ज़िंदगी का आखिर मकसद क्या है?

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
एक अनपढ़ आदमी के नाम कहीं से एक चिट्ठी आयी। अनपढ़ आदमी अकेला था। न आगे नाथ न पीछे पगहा। ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी ने उस अनपढ़ आदमी के नाम घर पर चिट्ठी भेजी हो। उस आदमी ने उलट-पलट कर उस लिफाफे को देखा। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर इसमें लिखा क्या है। किसी ने उसे चिट्ठी लिखी ही क्यों?
फिर छपेगा भारतीय मानक रुपया!

देश मंथन डेस्क :
भारतीय मानक रुपया अब एक नये कलेवर के साथ फिर आपके हाथों में आने वाला है। जी हाँ, भारत सरकार नये वर्ष 2015 की 1 जनवरी से एक रुपये के नोट की छपाई का शुरू कर सकती है।
वर्ष 2014 में 100 करोड़ क्लब में पहुँची 8 फिल्में

शिव ओम गुप्ता :
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड के लिए वर्ष 2014 का साल काफी बेहतरीन साल कहा जा सकता है। 2014 में रिलीज हुयीं कुल 8 फिल्मों ने 100 करोड़ से ऊपर का कारोबार करने में सफल रहीं। इनमें 2014 के आखिर में 19 दिसंबर में रिलीज हुई आमिर खान की बहुचर्चित फिल्म पीके भी शामिल हो गई है।
आदमी अपनों की चोट से ही टूटता है!

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
एक गाँव में एक लोहार रहता था। उसके बगल में एक सुनार रहता था। लोहार लोहे का काम करता और सुनार सोने का। लोहार लोहे को आग की भट्ठी में तपाता फिर उस पर हथौड़ा चलाता। सुनार भी सोने को आग में तपता फिर उस पर हथौड़े चलता।



अभिरंजन कुमार :
रत्नाकर त्रिपाठी :
शिव ओम गुप्ता :





